जम्मू, 20 फरवरी कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने बृहस्पतिवार को सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि छह दशक से अधिक पुराने इस समझौते के कारण क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है।
भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की बातचीत के बाद 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। विश्व बैंक भी इस संधि में पक्षकार था। संधि के तहत सीमा पार नदियों के पानी के उपयोग पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान की व्यवस्था है।
कर्रा ने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘जैसा कि हमने अपने (विधानसभा चुनाव) घोषणापत्र में पहले ही उल्लेख किया है कि सिंधु जल संधि की समीक्षा होनी चाहिए क्योंकि इस समझौते के कारण जम्मू कश्मीर के लोगों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है।’’
कांग्रेस नेता, जो पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के समर्थन में जम्मू क्षेत्र में पार्टी के 15 दिवसीय अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, ने चिनाब घाटी क्षेत्र के रामबन, डोडा और किश्तवाड़ में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया। इस क्षेत्र में जम्मू कश्मीर की अधिकतर जलविद्युत परियोजनाएं स्थित हैं।
चिनाब क्षेत्र के लोगों की मुफ्त या सब्सिडी वाली बिजली की मांग को उचित ठहराते हुए कर्रा ने कहा कि सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और इस संबंध में एक उपयुक्त तंत्र तैयार करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चिनाब क्षेत्र के आंदोलनरत लोगों की बात सुनने के बजाय प्रशासन उन पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की धमकी दे रहा है।
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