श्रीनगर, 14 जुलाई जम्मू-कश्मीर में ‘हाउसबोट’ की मरम्मत कराने की अनुमति देने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश से इनके मालिकों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन इनमें से कई लोगों का मानना है कि इस देरी के कारण वे आर्थिक तंगी में घिर गए हैं और अब उनके पास इस खर्चीले काम के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
हाउसबोट मालिक संघ के अध्यक्ष मंजूर अहमद पख्तून ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश स्वागत योग्य है।
पख्तून ने कहा, “यह काफी समय से लंबित मुद्दा था, जिसके कारण बड़ी संख्या में हाउसबोट की मरम्मत की आवश्यकता हो गई है। प्रत्येक हाउसबोट की अब थोड़ी या ज्यादा मरम्मत की आवश्यकता है। हम उच्च न्यायालय और उपराज्यपाल के बहुत आभारी हैं क्योंकि इस फैसले के बाद हाउसबोट से जुड़े कई लोगों को राहत मिली है।”
उन्होंने कहा, "अब हमें उम्मीद है कि हाउसबोट की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए जल्द ही आदेश मिल सकता है और हमें आशा है कि मौजूदा हाउसबोट को बरकरार रखा जाएगा।”
साल 1988 में, फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण कश्मीर में नई हाउसबोटों के निर्माण और मौजूदा हाउसबोट की मरम्मत व नवीकरण पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब सरकार पर्यावरण को बचाने के लिए हाउसबोट की संख्या कम करना चाहती थी।
पख्तून ने कहा कि शहर के चार जल निकायों - डल झील, निगीन झील, चिनार बाग और झेलम नदी - में केवल 750 से 800 हाउसबोट बची हैं।
उन्होंने दावा किया कि 1990 की शुरुआत में इनकी संख्या लगभग 2,000 थी।
उन्होंने कहा, "हम हाउसबोट के लिए एक व्यापक नीति बनाने का अनुरोध करते हैं क्योंकि जो हाउसबोट बाकी हैं, उन्हें बचाया जाना चाहिए।"
हाउसबोट मालिक गुलाम कादिर गस्सी ने कहा कि वह इस आदेश के लिए आभारी हैं लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि यह थोड़ा देर से आया है।
गस्सी ने कहा, “हम सरकार के बहुत आभारी हैं । यदि प्रतिबंध पहले ही हटा दिया गया होता तो मुझे अब यह परेशानी नहीं होती। मेरी हाउसबोट झेलम नदी में डूब गई और मेरी सारी संपत्ति और सामान बर्बाद हो गया। हम अब बेघर हैं।”
तंबू में रहने वाले गस्सी ने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रशासन उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाए।
उन्होंने कहा, "मेरे परिवार की स्थिति बहुत दयनीय है। हम प्रतिकूल मौसम में एक तंबू के नीचे रहते हैं, जो हमारे लिए भयावह है। मेरा परिवार अब अवसाद से पीड़ित है और मेरे बच्चों की शिक्षा में भी बहुत दिक्कत हो रही है... मैं अधिकारियों से अनुरोध करता हूं कि वे मुझे पर्याप्त धन प्रदान करें, जिससे मेरी समस्याएं समाप्त हों।”
एक और हाउसबोट मालिक नाजिर अहमद ने कहा कि हाउसबोट की मरम्मत में काफी खर्च आएगा और हाउसबोट में रहने वाले अधिकांश लोगों की आय कम है।
उन्होंने कहा, "हमें अब मरम्मत कार्य के लिए धन की आवश्यकता है। हमारी आय काफी कम है। हमारी कमाई उन पर्यटकों से होती है जो हाउसबोट किराए पर लेते हैं। लेकिन हाउसबोट की हालत बेहद खराब होने के कारण पर्यटक नहीं आते। वे आते भी हैं तो हाउस बोट की दयनीय स्थिति को देखकर उनके मन में डर बैठ जाता है।”
पर्यटन विभाग के सचिव सैयद आबिद रशीद शाह ने कहा कि हाउसबोट जम्मू-कश्मीर की विरासत हैं और बाहर से आने वाले व घरेलू पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षणों में से एक हैं।
उन्होंने कहा, "हमने यह सुनिश्चित किया कि हम उनके और अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे। उदाहरण के लिए, हाउसबोट की मरम्मत के लिए वन विभाग, वन निगम और झील विभाग को बोर्ड से बात करने की जरूरत है। कुल मिलाकर, सभी प्रमुख समस्याओं का समाधान कर लिया गया है और उन्हें विभाग की ओर से जैसी मदद की आवश्यकता होगी, हम करेंगे।”
जोहेब नरेश
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