मुंबई, 12 मई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्रांस यात्रा से पहले भारत में कार्यरत वरिष्ठ फ्रांसीसी राजनयिक ने बृहस्पतिवार को कहा कि जैतपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना ‘अहम मुद्दा’ है और इसपर अब भी चर्चा चल रही है।
जैतपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना की तुलना दसॉल्ट प्रणाली से करते हुए मुंबई में कार्यरत फ्रांस के महावाणिज्य दूत जीन मार्क सेरे शार्लेट ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की तरह 10 हजार मेगावाट की जैतपुर परियोजना का प्रभाव आने वाले 50 सालों तक रहेगा। उल्लेखनीय है कि जैतपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना का निर्माण फ्रांसीसी ऊर्जा कंपनी ईडीएफ द्वारा किया जाना प्रस्तावित है जबकि दसॉल्ट ने राफेल विमानों की आपूर्ति की है।
सेरे शार्लेट ने इसे ‘बहुत ही संवेदनशील’ करार देते हुए कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि यह (जैतपुर) अहम मुद्दा है क्योंकि यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दे पर अगले 50 साल के लिए सहयोग को लेकर है...यह वह परियोजना है जो हमारे संबंधों की कुंजी है, हमें इसपर और काम करने की जरूरत है और कर रहे हैं।’’
वरिष्ठ राजनयिक मोदी की यात्रा से दोनों देशों को होने वाले लाभ और उसके आधार पर किए जाने वाले कार्य को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
सेरे शार्लेट ने हालांकि, महाराष्ट्र में पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील कोंकण तट पर प्रस्तावित इस योजना को लेकर हो रही बातचीत की अद्यतन जानकारी देने से इनकार कर दिया जिसपर वर्ष 2009 से ही कार्य हो रहा है।
जब सेरे शार्लेट से पूछा गया कि क्या नागरिक परमाणु दायित्व शर्त पर कोई प्रगति हुई तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि परमाणु दायित्व की शर्त सबसे संवेदनशील मुद्दा है जिसको लेकर फ्रांसीसी पक्ष चिंतित है।
फ्रांसीसी राजनयिक ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध मजबूत हैं व दोनों देश इस साल रणनीतिक सहयोग की रजत जयंती मना रहे हैं।
सेरे शार्लेट ने कहा कि भारत और फ्रांस की सेनाएं लगातार संयुक्त युद्धाभ्यास करती हैं और पिछली बार दोनों देशों की वायुसेनाओं ने संयुक्त अभ्यास किया। उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी फ्रिगेट (युद्ध पोत) अगले महीने मुंबई बंदरगाह पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि इस साल 14 जुलाई को ‘बैस्टिल दिवस’ समारोह के दौरान दोनों पक्षों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ मार्च करेंगी।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद भारत-फ्रांस संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बाधा साबित होंगी क्योंकि यह रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के पश्चिम के प्रयासों को विफल करता है, तो उन्होंने न में जवाब दिया।
सेरे शार्लेट ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर विभिन्न चर्चाओं के दौरान रूस का पक्ष नहीं लिया, और किसी को भी देश के साथ सस्ते में तेल खरीदने और यहां तक कि पश्चिम में उन्हीं देशों को बेचने में कोई समस्या नहीं हो सकती है, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं।
फ्रांसीसी राजनयिक ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र फ्रांस के लिए महत्वपूर्ण है, जिसकी क्षेत्र के आसपास के विभिन्न द्वीपों में करीब 10 लाख से अधिक की आबादी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है।
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