देश की खबरें | यह केंद्र पर है कि वह डल्लेवाल को जबरन धरना स्थल से हटाना चाहता है या नहीं: किसान नेता
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार को 34वें दिन में प्रवेश कर गया और खनौरी में अन्य नेताओं ने कहा कि वे गांधीवादी तरीके से अपना विरोध जारी रखे हुए हैं तथा यह सरकार पर है कि वह उनके वरिष्ठ नेता (डल्लेवाल) को हटाने के लिए बल प्रयोग करना चाहती है या नहीं।
चंडीगढ़, 29 दिसंबर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार को 34वें दिन में प्रवेश कर गया और खनौरी में अन्य नेताओं ने कहा कि वे गांधीवादी तरीके से अपना विरोध जारी रखे हुए हैं तथा यह सरकार पर है कि वह उनके वरिष्ठ नेता (डल्लेवाल) को हटाने के लिए बल प्रयोग करना चाहती है या नहीं।
किसान नेताओं का यह बयान डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती न कराये जाने को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना किए जाने के बीच आया है।
किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए पंजाब-हरियाणा सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
खनौरी सीमा विरोध स्थल पर किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने संवाददाता से कहा, ‘‘हम यह साफ करना चाहते हैं कि केंद्र पहले दिन से ही हमारे आंदोलन को बदनाम करने और दबाने की कोशिश कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस तरह की कहानी गढ़ी जा रही है कि किसान जिद्दी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जबकि केंद्र ही ऐसा (जिद्दी) रवैया अपना रहा है, हमारी बात नहीं सुन रहा है और किसानों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।’’
किसान नेता ने कहा, ‘‘हम गांधीवादी सिद्धांतों को अपनाकर अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। हमारे आंदोलन ने साबित कर दिया है कि सरकार के अत्याचारों के कारण इतना कुछ सहने के बावजूद हम गांधीवादी तरीके से विरोध करना जारी रखे हुए हैं।’’
कोहाड़ ने कहा, ‘‘हम इन सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं। अब यह सरकार और संवैधानिक संस्थानों पर निर्भर है कि वे डल्लेवाल जी को हटाने के लिए बल प्रयोग करना चाहते हैं या नहीं।’’
उन्होंने कहा कि किसान यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जो भी स्थिति उत्पन्न होगी, उसकी जिम्मेदारी केंद्र और संवैधानिक संस्थाओं की होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम देश के लोगों से यह भी अपील करना चाहते हैं कि एमएसपी की गारंटी की मांग करने वाला आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच गया है। हम जीत की ओर हैं... हमें कड़ा रुख अपनाना चाहिए। डल्लेवाल ने अपनी जान तक दांव पर लगा दी है।’’
कोहाड़ ने कहा कि यह देश के लोगों पर निर्भर करता है कि वे घर ही बैठे रहे या डल्लेवाल के समर्थन में खनौरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पहुंचे।
एसकेएम (गैर-राजनीतिक) नेता काका सिंह ने कहा कि सरकार डल्लेवाल को धरना स्थल से हटाने की कोशिश कर सकती है और उनकी यूनियन पंजाबियों से अधिक से अधिक संख्या में खनौरी पहुंचने की अपील कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि डल्लेवाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस देश के किसानों की खातिर अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं।
इस बीच, किसानों ने चार जनवरी को खनौरी विरोध स्थल पर ‘‘किसान महापंचायत’’ का आह्वान किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने भी सोमवार को पंजाब बंद का आह्वान किया है और दावा किया है कि उनके बंद के आह्वान को ट्रांसपोर्टर, कर्मचारियों, व्यापारियों और समाज के अन्य वर्गों से मजबूत समर्थन मिला है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सोमवार को पूर्ण बंद रहेगा, लेकिन आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी।
शनिवार को पंजाब सरकार पर नाखुशी जाहिर करते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह भी संकेत जताया कि डल्लेवाल को अन्य किसान नेताओं ने अस्पताल ले जाने नहीं दिया होगा।
इसके जवाब में डल्लेवाल ने उसी दिन एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘मैं अनशन पर बैठा हूं। उच्चतम न्यायालय को यह रिपोर्ट किसने दी और यह भ्रांति किसने फैलाई कि मुझे बंधक बनाकर रखा गया है? ऐसी बात कहां से आई?’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस देश में सात लाख किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों को बचाना जरूरी है, इसलिए मैं यहां बैठा हूं। मैं किसी के दबाव में नहीं हूं।’’
डल्लेवाल ने पहले कहा था कि जब तक सरकार किसानों की मांगों पर सहमत नहीं हो जाती, तब तक वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे। उच्चतम न्यायालय ने पंजाब सरकार को डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है, साथ ही राज्य को जरूरत पड़ने पर केंद्र से सहायता लेने के लिए कहा है।
इसके जवाब में पंजाब सरकार ने अदालत में कहा कि उसे प्रदर्शनकारी किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने डल्लेवाल को घेर लिया है और उन्हें अस्पताल ले जाने से रोक रहे हैं।
डल्लेवाल ने उपचार से इनकार कर दिया है और राज्य सरकार ने उनके स्वास्थ्य की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए चिकित्सकों की एक टीम बनाई है।
सुरक्षाबलों द्वारा दिल्ली में प्रवेश से रोके जाने के बाद से किसान संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू तथा खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 29, 2024 09:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

