देश की खबरें | उदारता, सहयोग से स्वस्थ समाज का निर्माण संभव : राष्ट्रपति मुर्मू
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बारीपदा (ओडिशा), छह मई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि उदारता और सहयोग से एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे वंचितों का हाथ थामकर जीवन में आगे बढ़ने में उनकी मदद करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को केवल अपने सुख और हित के बारे में नहीं, बल्कि समाज और देश के कल्याण के बारे में भी सोचना चाहिए।
मुर्मू ने यहां महाराजा श्रीराम चंद्र भांजा देव विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "सहयोग जीवन का एक सुंदर पक्ष है जिसका छात्रों को अनुसरण करना चाहिए।"
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘लोगों में प्रतिस्पर्धा की भावना स्वाभाविक है... यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है... जीवन में आगे बढ़ते हुए जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो पाएंगे कि समाज के कुछ लोग उनका मुकाबला करने के काबिल नहीं हैं।’’
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे वंचित लोगों का हाथ थामकर आगे बढ़ने में उनकी मदद करें।
मुर्मू ने कहा कि छात्रों को हमेशा प्रत्येक प्रतियोगिता में सफल होने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए और इसके लिए उन्हें बेहतर कौशल प्राप्त करते रहना चाहिए तथा अधिक दक्षता की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘वे (विद्यार्थी) अपनी इच्छा शक्ति से असंभव को संभव में बदल सकते हैं।’’
मुर्मू अपने गृह जिले ओडिशा के मयूरभंज दौरे के तीसरे और आखिरी दिन दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं।
छात्रों को संबोधित करने से पहले, मुर्मू ने आदिवासी समूहों के प्रतिनिधिमंडलों से विश्वविद्यालय परिसर में मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन में एक सतत प्रक्रिया है और केवल डिग्री हासिल करने का मतलब यह नहीं है कि यह पूरी हो गई है। मुर्मू ने कहा कि स्नातक होने के बाद कुछ छात्र नौकरी करेंगे और कुछ व्यवसाय करेंगे, जबकि अन्य अनुसंधान में शामिल हो सकते हैं, ‘‘लेकिन नौकरी देने के बारे में सोचना नौकरी करने के बारे में सोचने से बेहतर है।’’
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय द्वारा एक इंक्युबेशन सेंटर स्थापित किए जाने और अपने छात्रों, पूर्व छात्रों तथा आम लोगों को स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान किए जाने पर संतोष व्यक्त किया।
उन्होंने आदिवासी प्रथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से अपने परिसर में 'पवित्र वृक्षवाटिका' स्थापित करने के लिए संस्थान की सराहना की।
मुर्मू ने कहा, "पर्यावरण और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए पवित्र वृक्षवाटिका महत्वपूर्ण है। यह प्राकृतिक संसाधनों के समुदाय आधारित प्रबंधन का भी एक सर्वोत्तम उदाहरण है।’’
उन्होंने कहा कि दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है तथा भारत ने प्रकृति के अनुकूल ‘‘पर्यावरण के लिए जीवन शैली’’ को अपनाने में एक मिसाल कायम की है।
मुर्मू ने कहा, “हमारी परंपरा में यह माना जाता है कि पेड़, पौधे, पहाड़, नदियों में जीवन होता है। मनुष्य ही नहीं सभी जीव प्रकृति की संतान हैं। इसलिए, यह सभी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वे प्रकृति के साथ सद्भाव से रहें।”
मुर्मू ने कहा कि ओडिशा में सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता के लिए विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उम्मीद है कि विश्वविद्यालय के छात्र तथा शिक्षक अपने शोध और नवाचार के माध्यम से इसे बचाने का रास्ता खोज लेंगे।
राष्ट्रपति ने शुक्रवार को राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया था। चार दशक से अधिक समय में किसी भी राष्ट्रपति की राष्ट्रीय उद्यान की यह पहली यात्रा थी।
दीक्षांत समारोह के बाद राष्ट्रपति ने अपने गृह जिले मयूरभंज की अपनी तीन दिवसीय यात्रा समाप्त की और पश्चिम बंगाल में कलाईकुंडा हवाई अड्डे के लिए रवाना हुईं। वहां से वह वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
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