चेन्नई, 15 मई ‘डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन’ के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अभिषेक सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) संबंधी अपना ढांचा विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने दावा किया कि कई देशों में एआई के नियमन के लिए कानून हैं, लेकिन भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है।
सिंह ने यहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में ‘भारत के लिए जिम्मेदार एआई’ विषय पर आयोजित सीईआरएआई (सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई) की पहली कार्यशाला को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम इस दिशा में सोच रहे हैं। डिजिटल इंडिया अधिनियम जब भी पारित होगा, उसमें दिशानिर्देशों को लागू करने के प्रावधान होंगे।’’
उन्होंने कहा कि एआई संबंधी दिशानिर्देश नवोन्मेष को बाधित नहीं करेंगे बल्कि उपयोगकर्ताओं को नैतिक और जिम्मेदार समाधान प्रदान करते हुए नवोन्मेष एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देंगे।
सिंह ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की एआई संबंधी अपनी एक समिति है जिसने आईएसओ (अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन) मानकों के समकक्ष भारतीय मानकों के लिए एक मसौदा का प्रस्ताव सामने रखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ट्राई (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) ने एआई के जोखिमों पर चिंता व्यक्त करते हुए एक परामर्श पत्र जारी किया है। जिम्मेदार और नैतिकपूर्ण एआई के लिए हम अपने ढांचे को अंतिम रूप देने के मकसद से इस पत्र पर गौर कर रहे हैं।’’
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