देश की खबरें | इसरो ने पीएसएलवी-सी55 मिशन में ‘पोइम-2’ का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक प्रयोग किया

श्रीहरिकोटा, (आंध्र प्रदेश), 22 अप्रैल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने शनिवार को यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में एक बड़ी कवायद की और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) रॉकेट के चौथे चरण का उपयोग करते हुए 'कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोग' शुरू किया।

इसरो के पीएसएलवी सी55 रॉकेट द्वारा सिंगापुर के दो उपग्रहों- ‘टेलीओएस-2’ और ‘ल्यूमलाइट-4’ को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए जाने के तुरंत बाद वैज्ञानिकों ने इसके द्वारा ले जाए गए गैर-पृथक उपकरणों के जरिए वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए ‘पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल-2’ (पोइम-2) का उपयोग एक कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में किया।

उपग्रह मिशन की सफलता की घोषणा करते हुए इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा, " सात उपकरणों के साथ ‘पोइम’ कुछ और ‘पोइम’ (कविताएं) लिखने जा रहा है।"

संबंधित उपकरण इसरो, बेलाट्रिक्स, ध्रुव स्पेस और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के हैं।

सोमनाथ ने कहा कि इसमें "रॉकेट के ऊपरी चरण में पहली बार तैनाती योग्य सौर पैनल" है। उन्होंने कहा कि यह घटित होने जा रही एक और रोमांचक बात है।

अभियान को अंजाम देने के लिए ‘पोइम-2’ के उपकरणों को वैज्ञानिकों द्वारा संचालित किया जाएगा। प्लेटफॉर्म के सौर पैनल को जमीन पर मौजूद टीम के जरिए इस तरह स्थापित किया जाएगा, जिससे कि उसका अग्रिम भाग सूर्य की तरफ रहे।

उपकरणों और वैमानिकी प्रणाली को उनकी आवश्यकताओं के आधार पर ऊर्जा प्रदान की जाएगी।

वैज्ञानिकों द्वारा शनिवार को किया गया अभियान ऐसा तीसरा अभियान है, जब चौथे चरण का उपयोग उपग्रहों के अलग होने के बाद प्रयोगों के लिए एक प्लैटफॉर्म के रूप में किया गया है।

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