देश की खबरें | आईएसआई और आतंकी समूह आतंकियों की भर्ती के लिए कर रहे ऑनलाइन मंचों का इस्तेमाल
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श्रीनगर, 20 अक्टूबर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकी समूह डिजिटल मंचों के जरिए जम्मू-कश्मीर में भर्ती के प्रयास तेज करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि कड़े सुरक्षा प्रबंधों के चलते प्रत्यक्ष संवाद करना मुश्किल होता जा रहा है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
एक अधिकारी के अनुसार ये समूह सोशल मीडिया मंचों और ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप के जरिए कम उम्र के युवाओं को बहकाने का प्रयास कर रहे हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए वे फर्जी प्रोफाइल और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एक बार पहचान हो जाने के बाद इन युवकों को निजी समूहों में शामिल कर लिया जाता है, जहां उन्हें सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से किए गए अत्याचारों से जुड़े वीडियो समेत बरगलाने वाली चीजें दिखाई जाती हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से जुड़े हैंडलर नफरत भड़काने और भर्ती के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए यह रणनीति अपनाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि एक नयी चिंता यह पैदा हुई है कि इन समूहों में भर्ती होने वाले संभावित लोगों को अब सैय्यद कुतुब नामक मिस्र के चरमपंथी से जु़डा साहित्य पढ़ाया जा रहा है, जिसकी विचारधारा ने अल-कायदा समेत विभिन्न कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को काफी प्रभावित किया है।
साल 1966 में फांसी पर लटकाए गए कुतुब ने धर्मनिरपेक्ष सरकारों और पश्चिमी देशों के प्रभाव के खिलाफ जिहाद की वकालत की थी।
अधिकारियों ने बताया कि पहले आतंकवाद समर्थक नए लोगों की भर्ती के लिए प्रत्यक्ष संपर्क पर निर्भर रहते थे, लेकिन जैसे-जैसे सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्कों को ध्वस्त करने के प्रयास तेज किए हैं, उनके तरीके भी बदल गए हैं।
नए भर्ती हुए लोगों को क्षेत्र में काम सौंपे जाने से पहले यूट्यूब समेत विभिन्न डिजिटल माध्यमों से प्रशिक्षण दिया जाता है।
अधिकारियों ने विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर में सोशल मीडिया के माध्यम से भर्ती और विचारधारा को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। इन खतरों का मुकाबला करने के लिए, सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया निगरानी इकाइयां स्थापित की हैं जो संदिग्ध लोगों पर नजर रखकर कार्रवाई करती हैं।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के प्रसार ने सोशल मीडिया को संचार और सूचना साझा करने का एक आकर्षक साधन बना दिया है, जिससे आतंकवादी संगठनों को अपना नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि खुद को चरम राष्ट्रवादी बताने वाले कुछ व्यक्तियों की पहचान प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी सहित कट्टरपंथी समूहों से जुड़े होने के रूप में की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, आतंकवादी गुप्त संचार और परिचालन समन्वय के लिए टेलीग्राम और मैस्टोडॉन जैसे कूट संदेश (एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग) भेजने वाले मंच और ऐप का तेजी से लाभ उठा रहे हैं। ऐसे ऐप पर राजौरी और पुंछ जैसे कुछ जिलों में पहले से ही प्रतिबंधित हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 20, 2024 04:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

