देश की खबरें | तर्कहीन और विवेकहीन गिरफ्तारी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘तर्कहीन और विवेकहीन गिरफ्तारियां’ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं और पुलिस के लिए गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए और यह उन असाधारण मामलों तक सीमित होना चाहिए जहां आरोपी को गिरफ्तार करना अति आवश्यक है या उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।

प्रयागराज, 21 जून इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘तर्कहीन और विवेकहीन गिरफ्तारियां’ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं और पुलिस के लिए गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए और यह उन असाधारण मामलों तक सीमित होना चाहिए जहां आरोपी को गिरफ्तार करना अति आवश्यक है या उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मोहम्मद तबीश रज़ा नाम के एक व्यक्ति को अंतरिम जमानत देते हुए कहा, ‘‘प्रतिवादी की दलीलों पर विचार करने के बाद यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि पुलिस याचिकाकर्ता को कब गिरफ्तार करेगी।’’

अदालत ने 12 जून के अपने निर्णय में कहा, ‘‘प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस अपनी इच्छा पर गिरफ्तारी कर सकती है। आरोपी को गिरफ्तार करने की कोई निश्चित अवधी तय नहीं है। अदालतें बार बार कहती रही हैं कि पुलिस के लिए गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘गिरफ्तारी उन असाधारण मामलों तक सीमित रहनी चाहिए जहां आरोपी को गिरफ्तार करना अति आवश्यक है या उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। तर्कहीन और विवेकहीन गिरफ्तारी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।’’

मोहम्मद तबीश रज़ा के खिलाफ वाराणसी के लंका थाने में गो हत्या निषेध अधिनियम की धारा 3/5-ए/5-बी/8 और पशु क्रूरता निषेध अधिनियम की धारा 11 एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है और आशंका है कि पुलिस किसी भी समय उसे गिरफ्तार कर सकती है। वहीं सरकारी वकील ने अंतरिम जमानत की अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए वह अंतरिम जमानत पाने का पात्र नहीं है।

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