विदेश की खबरें | ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनी ने अमेरिका के चुनाव का मखौल उड़ाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. अयातुल्ला अली खामेनी ने ईरान के पुराने रुख को दोहराया कि ट्रंप जीतें या जो बाइडेन जीतें, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

अयातुल्ला अली खामेनी ने ईरान के पुराने रुख को दोहराया कि ट्रंप जीतें या जो बाइडेन जीतें, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

ट्रंप के और चार साल के कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव सामने आ सकता है जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था और प्रभावित हो सकती है। इससे तेहरान के विदेशों में अपने कच्चे तेल को खुलेआम बेचने पर रोक लग सकती है। हालांकि बाइडेन ने कहा है कि वह तेहरान के विश्व शक्तियों के साथ 2015 के परमाणु समझौते में फिर से शामिल करने पर विचार करेंगे, जिससे संकटग्रस्त ईरानी रियाल को संभावित राहत मिलेगी।

यह भी पढ़े | US Presidential Election 2020: उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस की जीत के लिए तमिलनाडु में उनके पैत्रिक गांव थुलसेंद्रपुरम में की गई पूजा-अर्चना, पोस्टर भी लगाए गए.

खामेनी ने कहा, ‘‘यदि आप उनकी खुद की स्थिति को देखते हैं, तो यह देखना बहुत मजेदार है। वर्तमान राष्ट्रपति जिनसे चुनाव कराने की उम्मीद की जाती है, उनका कहना है कि यह देश के इतिहास का सबसे धांधली वाला अमेरिकी चुनाव है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह कौन कहता है? मौजूदा राष्ट्रपति जो खुद चुनाव की व्यवस्था कर रहे हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी कहते हैं कि ट्रंप व्यापक रूप से धोखाधड़ी करना चाहते हैं। यह अमेरिकी लोकतंत्र है।’’

यह भी पढ़े | US Presidential Elections 2020: चुनावों के बाद अराजकता की आशंका से डरे हुए हैं अमेरिकी मतदाता निखिला नटराजन  .

खामेनी ने कहा कि चुनाव के परिणाम से ‘‘हमारा कोई लेना- देना नहीं है, जिसका अर्थ है कि यह हमारी नीति को प्रभावित नहीं करेगा। हमारी नीति स्पष्ट है और किसी के आने या जाने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’

खामेनी (81) ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश में सभी मामलों पर अंतिम फैसला करते हैं। उन्होंने परमाणु समझौते के लिए प्रयासों को मंजूरी दी, जिसके तहत ईरान आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपना यूरेनियम संवर्धन सीमित करने पर सहमत हुआ था।

हालांकि ट्रंप ने यह कहते हुए 2018 में अमेरिका के समझौते से अलग होने की घोषणा की थी कि यह न तो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और न ही इसकी क्षेत्रीय नीतियों का समाधान करता है। ईरान बाद में समझौते की सभी पाबंदियों से हट गया था, हालांकि तेहरान अब भी संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को परमाणु स्थलों तक पहुंच प्रदान करता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\