ईरान: "हिजाब उतारने" की अपील करने वाले गायक पर केस दर्ज

ईरान में गायक मेहदी याराही पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ईरान में गायक मेहदी याराही पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है. उन्होंने अपने नए गाने में महिलाओं को हिजाब उतारने के लिए प्रोत्साहित किया है. प्रशासन का कहना है कि यह "इस्लामिक समाज की नैतिकताओं और परंपराओं के खिलाफ है."गाने की पंक्तियों में कहा गया कि ईरान की जनता चाहती है कि हिजाब को वैकल्पिक बनाया जाए. यानी, इसे पहनना है या नहीं, इसका चुनाव लोग करें.

इस फारसी गाने की पंक्तियों का भाव कुछ यूं है, "अपना हिजाब उतार दो, सूरज डूब रहा है. अपना हिजाब उतार दो, तुम्हारी खुशनुमा सुगंध हवाओं में भर रही है. उतार दो अपने हिजाब, अपने बाल लहराने दो. डरो मत, मेरी प्यारी हंसो, आंसुओं के खिलाफ आवाज बुलंद करो."

गाने के वीडियो में महिलाएं बिना हिजाब पहने नाचती नजर आती हैं. इसमें पिछले साल हुए ईरान में हुए हिजाब विरोधी प्रदर्शनों की भी फुटेज है, जिनमें महिलाएं हिजाब को आग में जलाती दिखाई दे रही हैं.

25 अगस्त को गाना जारी करते हुए मेहदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो भी डाला. इसमें वीडियो शुरू होने के पहले एक संदेश था, "हिजाब को वैकल्पिक बनाना, ईरान की उस शोषित आवाम की कई गंभीर मांगों में से एक है जिन्होंने आजादी और लोकतंत्र हासिल करने के लिए कई अपनों का बलिदान दिया है."

फिर मेहदी अपना गाना महिलाओं को समर्पित करते हुए लिखते हैं, "मेरे वतन की शानदार महिलाओं को समर्पित, जो "वुमन, लाइफ, फ्रीडम" आंदोलन की अगली पांत में बहादुरी से जगमगा रही हैं."

हिजाब "दमन का प्रतीक"

मेहदी याराही ईरान के जाने-माने पॉप गायक हैं. 2018 के फज्र फेस्टिवल में उन्हें बेस्ट पॉप सिंगर का पुरस्कार भी मिला था. यह ईरान का सबसे अहम सालाना फिल्म उत्सव है, जो संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में आयोजित किया जाता है.

हालांकि हालिया सालों में मेहदी, प्रशासन की आलोचना करते आए हैं. पिछले साल 22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के विद्रोह में उनका एक गाना "विमिन्स ऐंथम" जनगीत बन गया था. मीजान न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मेहदी पर शुरू हुई हालिया कानूनी कार्रवाई में उस गाने से जुड़े आरोप भी शामिल किए जाएंगे.

ईरान में महिलाओं के लिए सिर ढकना अनिवार्य है. इससे जुड़ी अनुशंसाओं ने 1983 में कानून की शक्ल ली. ईरान की मोरैलिटी पुलिस बहुत सख्ती से "इस्लामिक ड्रेस कोड" का पालन करवाती है. उल्लंघन की स्थिति में कैद तक हो सकती है.

हिजाब का विरोध भी नया नहीं है. बड़ी संख्या में महिलाओं का कहना है कि हिजाब "जुल्म का प्रतीक" बन गया है. हालांकि हिजाब विरोधी प्रदर्शनों में विरोध बस हिजाब तक सीमित नहीं था. यह आजादी और लोकतंत्र का भी आंदोलन था.

एसएम/सीके (एएफपी, ईएफई)

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