नयी दिल्ली, छह जून सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिंद-प्रशांत समृद्धि आर्थिक प्रारूप (आईपीईएफ) समूह के 13 सदस्यों ने निष्पक्ष और स्वच्छ अर्थव्यवस्था के समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जबकि भारत घरेलू स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद इस पर हस्ताक्षर करेगा।
वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "भारत ने इन समझौतों पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं किए हैं क्योंकि घरेलू मंजूरी प्रक्रिया अभी भी चल रही है और नई सरकार के गठन के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।"
देश में इस समय सरकार गठन की प्रक्रिया चल रही है। चार जून को लोकसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए गए थे।
इन समझौतों पर सिंगापुर में हस्ताक्षर किए गए। मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए 14 सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सिंगापुर में एकत्र हुए हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने किया।
इन समझौतों पर बातचीत का दौर पिछले साल नवंबर में पूरा हुआ था।
आईपीईएफ समूह का गठन 23 मई, 2022 को टोक्यो में अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अन्य भागीदार देशों ने संयुक्त रूप से किया था। ये सभी देश दुनिया के आर्थिक उत्पादन का 40 प्रतिशत और व्यापार का 28 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
यह ढांचा व्यापार, आपूर्ति शृंखला, स्वच्छ अर्थव्यवस्था और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था से संबंधित चार खंडों के इर्दगिर्द बना हुआ है। भारत व्यापार को छोड़कर सभी खंडों में शामिल हो गया है।
इस समूह के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई दारुस्सलाम, फिजी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, "आईपीईएफ के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान करने और एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए अपनी तरह का पहला नजरिया है। भारत ने हस्ताक्षर की कार्यवाही और मंत्रिस्तरीय विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।"
ये समझौते कम-से-कम पांच भागीदारों के स्तर पर अनुमोदन एवं स्वीकृति के लिए आंतरिक कानूनी प्रक्रियाएं पूरा करने के बाद प्रभावी होंगे।
स्वच्छ अर्थव्यवस्था पर समझौते का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा एवं बदलाव, जलवायु लचीलापन एवं अनुकूलन, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के प्रयासों में तेजी लाना, जीवाश्म ईंधन ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के नए तरीके खोजना, तकनीकी सहयोग, कार्यबल विकास, क्षमता निर्माण एवं अनुसंधान सहयोग बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास, पहुंच और तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग करना है।
इसके अलावा, निष्पक्ष अर्थव्यवस्था पर समझौते का उद्देश्य अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाना है जो सदस्य देशों के बाजारों में व्यापार और निवेश को बढ़ावा दे सके। इससे भ्रष्टाचार-विरोधी ढांचे को मजबूत कर भ्रष्टाचार पर लगाम, कर पारदर्शिता में सुधार लाने और सक्षम अधिकारियों के बीच कर उद्देश्यों के लिए सूचना साझा करने का रास्ता तैयार होगा।
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