देश की खबरें | कार्बन उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारत के लिए आवश्यक : टेरी
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नयी दिल्ली, आठ जुलाई अनुसंधान संस्थान टेरी ने शुक्रवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के जरिए निपटने के लिए भारत के प्रयासों में तेजी लाने की खातिर अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ और सहयोग आवश्यक हैं।
टेरी की महानिदेशक विभा धवन ने अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोजन सहयोग पर एक श्वेतपत्र जारी करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘नीदरलैंड की शाही सरकार द्वारा भारत में हरित हाइड्रोजन में डच प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता लाने के लिए इस पहल का हिस्सा बनने पर हमें गर्व है।"
दि एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) तथा नीदरलैंड इनोवेशन नेटवर्क ने संयुक्त रूप से दस्तावेज तैयार किया है।
भारत में नीदरलैंड के राजदूत मार्टन वान डेन बर्ग ने सहयोग की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, "स्वच्छ हाइड्रोजन हमारी सतत ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं की कुंजी है। यह हमें ऐसा रोमांचक क्षेत्र पेश करता है जिसका उज्ज्वल भविष्य है। हालांकि, अब भी शोध संबंधी सवाल हैं, व्यवसाय मॉडल को खुद को साबित करना है...।’’
टेरी के अनुसार, हाइड्रोजन क्षेत्र बड़े पैमाने पर उभर रहा है क्योंकि भारत में सालाना लगभग छह एमटी (मिलियन टन) हाइड्रोजन की खपत है जिसके 2050 तक प्रति वर्ष 28 एमटी तक पहुंच जाने का अनुमान है।
नीदरलैंड 150 से अधिक हाइड्रोजन संगठनों के साथ यूरोप में क्षेत्रीय हाइड्रोजन ‘हब’ बन रहा है। दोनों देश स्वच्छ हाइड्रोजन पर अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान, व्यापार और नवाचार साझेदारी स्थापित करना चाहते हैं।
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