देश की खबरें | एटा के घुंघरुओं की खनक से अपने प्रदर्शन को संवारेंगे अंतराष्ट्रीय कलाकार
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लखनऊ, 26 अक्टूबर उत्तरप्रदेश के एटा जिले में बने घुंघरू अब अपनी खनक से अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों की कला को निखारेंगे। दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, मलेशिया और कम्बोडिया समेत कई देशों के कलाकारों ने इन घुंघरुओं की मांग की है।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि एटा के घुंघरू अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कलाकारों के पैरों की शान बनेंगे। इनकी खनक दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया के देशों में भारतीय कलाकारों के हुनर और मेहनत की कहानी कहेगी। दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया और सऊदी अरब के कलाकारों ने एटा के घुंघरू की मांग की है।
उन्होंने बताया कि जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात सरीखे पश्चिम एशियाई देशों में भी एटा के घुंघरू को बड़ा बाजार मिल गया है। दुनिया के मंच पर मिल रहे इस मौके को हाथों हाथ लेते हुए राज्य सरकार ने केन्द्र के माध्यम से इन देशों को घुंघरुओं की आपूर्ति भी शुरू कर दी है। देश और दुनिया में मिल रहे बाजार और मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने घुंघरू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि दो साल पहले तक गुमनामी और बेजारी से जूझ रहे एटा के घुंघरू उद्योग में उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना ने नयी जान फूंकी है। राज्य सरकार भी एटा के कलाकारों के हुनर और मेहनत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पूरी मजबूती के साथ पेश करने में जुट गई है।
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कुटीर, लघु एवं मझोले उद्योग विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में ही एटा के घुंघरू और घंटी व्यापार में 15 से 20 फीसद की वृद्धि हुई है। ओडीओपी के तहत नए कलाकारों को प्रशिक्षण देकर उद्योग का विस्तार किया जा रहा है ताकि देश और विदेश में बढ़ती मांग को पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सके।
देश और विदेश में घुंघरुओं का सालाना औसत व्यापार 100 करोड़ रुपये का स्तर पार कर गया है। मौजूदा दौर में 10000 से ज्यादा लोग घुंघरू और घंटी उद्योग से सीधे तौर पर जुड़े हैं। ओडीओपी योजना के तहत राज्य सरकार इस उद्योग को बढ़ाने के लिए कलाकारों को 350 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ ही मुफ्त प्रशिक्षण और जरूरी साजो सामान उपलब्ध करा रही है।
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