प्रयागराज, 18 जुलाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा में शाही ईदगाह और जहांआरा की मस्जिद का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सर्वे कराने के आवेदन और इस मुकदमे में उत्तर प्रदेश सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्तियों पर सुनवाई कर तीन महीने के भीतर निर्णय करने का मथुरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) को सोमवार को निर्देश दिया।
भगवान श्री कृष्ण विराजमान और तीन अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित ने यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अग्रवाल और शशांक सिंह ने कहा कि शाही ईदगाह और जहांआरा की मस्जिद का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के लिए 14 अप्रैल, 2021 को मथुरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक आवेदन दाखिल किया गया, लेकिन आज की तिथि तक इस आवेदन पर निचली अदालत द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ताओं को मौजूदा याचिका दायर कर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की सहमति से मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति द्वारा किए गए अतिक्रमण और अवैध रूप से खड़ा किए गए ढांचे को हटाने के लिए 19 फरवरी, 2021 को भगवान श्री कृष्ण की ओर से मथुरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान एवं अन्य बनाम यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड शीर्षक से एक दीवानी मुकदमा दायर किया गया था।
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