नयी दिल्ली, 22 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरार स्वयंभू आध्यात्मिक उपदेशक वीरेंद्र देव दीक्षित द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में संचालित एक आश्रम के निरीक्षण का सोमवार को आदेश दिया, जहां कई लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली पीठ एक महिला की मां की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में महिला ने कहा है कि उनकी बेटी ‘आध्यात्मिक विश्व विद्यालय’ आश्रम में कुछ लोगों के प्रभाव में रह रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि दीक्षित के खिलाफ बलात्कार के गंभीर आरोप हैं। साथ ही अदालत ने सरकार को मामले में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील ने कहा कि बलात्कार के आरोप में दीक्षित के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गईं हैं और उसे पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
पीठ में न्यायमूर्ति मनोज जैन भी शामिल हैं। पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘ आध्यात्मिक विश्व विद्यालय में प्रतिवादी संख्या 6 (बेटी) सहित केवल पांच लड़कियां हैं। प्रभारी के खिलाफ गंभीर अपराध के तहत एक प्राथमिकी दर्ज है, इसलिए हम सरकार को संबंधित एसडीएम और डीसीपी के साथ उक्त आश्रम का निरीक्षण करने का निर्देश देते हैं। ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए।’’
याचिकाकर्ता महिला की बेटी को अदालत में पेश किया गया। अदालत में लड़की ने बताया कि वह 18 साल की वयस्क है और अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही है। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए 24 जनवरी को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ता की बेटी से इस अवधि में आश्रम नहीं छोड़ने को कहा।
अदालत ने लड़की को अगली सुनवाई के दौरान पेश करने का भी निर्देश दिया।
वर्तमान मामले के अलावा, दीक्षित के आश्रम से जुड़े दो अन्य मामले भी उच्च न्यायालय में लंबित हैं। इनमें एक वृद्ध दंपत्ति की याचिका भी शामिल है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी ‘उच्च शिक्षित बेटी’ को गुमराह करके वहां रहने के लिए बुलाया गया था और अब वह ‘अतिवादी विचारों’ से ग्रस्त है।
गैर सरकारी संगठन ‘फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पॉवरमेंट’ ने भी 2017 में एक याचिका दायर की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि दीक्षित के रोहिणी स्थित ‘आध्यात्मिक विश्वविद्यालय’ में कई नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है और उन्हें अपने माता-पिता से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने सीबीआई को दीक्षित का पता लगाने और आश्रम में लड़कियों तथा महिलाओं को कथित तौर पर बंधक बना कर रखे जाने की जांच करने का आदेश दिया था।
सीबीआई ने तब उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया था कि दीक्षित का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं तथा उसके फार्म हाउस और आश्रमों में छापेमारी की गई है। एजेंसी के अनुसार, दीक्षित की गिरफ्तारी के लिए विशेष दल भी गठित किए गए हैं।
पिछले साल 12 सितंबर को अदालत ने कहा था कि सीबीआई दीक्षित के बैंक खाते फ्रीज कर सकती है।
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