देश की खबरें | निसार उपग्रह की सफलता के साथ भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग की उड़ान शुरू

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(एस विजय कार्तिक)

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 30 जुलाई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के बीच साझेदारी के तहत बुधवार को जीएसएलवी रॉकेट से ‘निसार’ उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया गया।

‘निसार’ पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

इसरो के जीएसएलवी एफ-16 ने लगभग 19 मिनट की उड़ान के बाद और लगभग 745 किलोमीटर की दूरी पर निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) उपग्रह को सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित कर दिया।

इसरो ने कहा, ‘‘जीएसएलवी ने निसार को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।’’

बुधवार की यह उपलब्धि 18 मई को पीएसएलवी-सी61/ईओएस-09 मिशन की असफलता के बाद आई है, जिसमें इसरो का पीएसएलवी त्रुटि के चलते पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को वांछित कक्षा में पहुंचाने में विफल रहा था।

इसी प्रकार के उपग्रहों - रिसोर्ससैट और रीसैट श्रृंखला, जो परिचालनात्मक रूप से भारत पर केंद्रित थे, को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने के बाद, इसरो निसार मिशन के माध्यम से पृथ्वी ग्रह के अध्ययन की यात्रा पर निकल पड़ा है।

जीएसएलवी-एस16 रॉकेट की लंबाई 51.7 मीटर है। जीएसएलवी एफ-16 रॉकेट ने 27.30 घंटे की उलटी गिनती के बाद 2,393 किलोग्राम वजनी उपग्रह को लेकर उड़ान भरी। चेन्नई से लगभग 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित अंतरिक्ष केंद्र सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से प्रक्षेपण यान ने उड़ान भरी।

रॉकेट से अलग होने के बाद, वैज्ञानिक उपग्रह को संचालित करने का काम शुरू करेंगे, जिसमें उसे स्थापित करने और मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने में ‘‘कई दिन’’ लगेंगे।

निसार उपग्रह को वैश्विक स्तर पर माइक्रोवेव इमेजिंग के उद्देश्य से विकसित किया गया है और इसमें नासा द्वारा उपलब्ध कराया गया एल-बैंड रडार तथा इसरो द्वारा डिजाइन किया गया एस-बैंड रडार है, जो पूर्णतया पोलरिमेट्रिक और इंटरफेरोमेट्रिक डेटा प्राप्त करने की क्षमता रखता है।

मिशन का उद्देश्य अमेरिका और भारत के वैज्ञानिक समुदायों के साझा हित के क्षेत्रों में भूमि और हिमनद की गतिविधियों, भूमि पारिस्थितिकी तंत्र और महासागरीय क्षेत्रों का अध्ययन करना है।

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