जरुरी जानकारी | भारत की पेट्रोलियम मांग 2040 से पहले चरम पर पहुंचने की संभावना नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में 2040 से पहले पेट्रोलियम उत्पादों की मांग चरम पर पहुंचने की संभावना नहीं है और ऊर्जा के अन्य रूप धीरे-धीरे देश के विविध ऊर्जा स्रातों में जगह पाएंगे। सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम के सुराना ने मंगलवार को यह कहा।

नयी दिल्ली, दो नवंबर देश में 2040 से पहले पेट्रोलियम उत्पादों की मांग चरम पर पहुंचने की संभावना नहीं है और ऊर्जा के अन्य रूप धीरे-धीरे देश के विविध ऊर्जा स्रातों में जगह पाएंगे। सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम के सुराना ने मंगलवार को यह कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जलवायु सम्मेलन (सीओपी-26) में भारत के वर्ष 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने का साहसिक संकल्प जताया।

सुराना ने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियां बिजली वाहन चार्जिंग स्टेशन, जैव ईंधन और हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित करने जैसे वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में सोच-विचारकर ही निवेश कर रही हैं। ये निवेश शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की दिशा में हैं।

लेकिन दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश को अगले दो दशकों तक लगातार तेल पर निर्भर रहना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिये हमें ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के उपयोग की जरूरत है... लेकिन मौजूदा आकलन के आधार पर तेल की मांग 2040 से पहले चरम पर नहीं पहुंचेगी। ऊर्जा के अन्य रूप धीरे-धीरे देश के विविध ऊर्जा स्रातों में जगह पाएंगे।’’

ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिये देश की तेल पर निर्भरता बनी रहेगी। क्योंकि सड़क, रेल, हवाई और समुद्री परिवहन में ईंधन के रूप में तेल का ही उपयोग होता है। अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ इसकी जरूरत बढ़ रही है।

सुराना ने कहा कि तेल कंपनियां रिफाइनरियों और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा से उत्पन्न हरित ऊर्जा का उपयोग करने के लिए कदम उठा रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में किया जाएगा और यह वाहन ईंधन की मांग को कम नहीं करता है।

इसी तरह, हाइड्रोजन का उपयोग पेट्रोल और डीजल के उत्पादन के लिए किया जाएगा

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