देश की खबरें | भारतीय वैज्ञानिकों ने आईटीईआर परियोजना में बहुमूल्य योगदान दिया है: मोदी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने आईटीईआर परियोजना में बहुमूल्य योगदान दिया है और सर्वाधिक अत्याधुनिक मंच पर भारत की डिजाइन एवं निर्माण की क्षमताएं प्रदर्शित की हैं।
नयी दिल्ली, 28 जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने आईटीईआर परियोजना में बहुमूल्य योगदान दिया है और सर्वाधिक अत्याधुनिक मंच पर भारत की डिजाइन एवं निर्माण की क्षमताएं प्रदर्शित की हैं।
फ्रांस में दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ‘फ्यूजन डिवाइस’ को एसेंबल किये जाने की मंगलवार को शुरूआत किये जाने के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों का इस परियोजना में अहम योगदान है।
यह भी पढ़े | उत्तर प्रदेश: कानपुर में अपहरण और हत्या का 1 और मामला, 1 गिरफ्तार.
इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का उद्देश्य सूर्य की तरह ही ऊर्जा पैदा करना है। मंगलवार को, यह एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया क्योंकि दक्षिणी फ्रांस में वैज्ञानिकों और तकनीशियनों ने एक नाभिकीय (न्यूकलियर) फ्यूजन उपकरण के बड़े हिस्सों को एकत्र करना शुरू कर दिया।
कई देशों के नेताओं ने इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।
यह भी पढ़े | वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया अंबाला में करेंगे राफेल लड़ाकू विमानों की अगवानी.
फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने मोदी का संदेश पढ़ा।
अशरफ ने ट्वीट किया, ‘‘थर्मोन्यूक्लियर फ्यूजन से ऊर्जा पैदा करने के लिए फ्रांस में अंतरराष्ट्रीय परियोजना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया। प्रधानमंत्री के संदेश के अनुसार भारत के अहम योगदान हैं: 1. भारत मानवता की भलाई के लिए काम करता है। 2. हम ‘मेक इन इंडिया’ को दुनिया के सबसे ऊंचे स्तर पर ले जा सकते हैं।’’
मोदी ने कहा कि आईटीईआर से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों द्वारा प्रतिबद्धता, समर्पण और कड़ी मेहनत के कई वर्षों की एक असाधारण यात्रा है।
उन्होंने परियोजना में शामिल भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने सबसे अत्याधुनिक मंच पर भारत की डिजाइन और निर्माण की क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। समान रूप से, हमारे संस्थानों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दुनिया भर के अपने साथियों के साथ सहयोग करने से काफी फायदा हुआ है। भारत को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वैश्विक उद्यम का हिस्सा होने पर गर्व है।’’
भारत औपचारिक रूप से 2005 में आईटीईआर परियोजना में शामिल हुआ था और 2006 में साझेदारों के बीच आईटीईआर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)