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भारत सरकार ने धन शोधन मामले में नीरव मोदी के खिलाफ और सबूत जमा किये

डिस्ट्रिक्ट जज सैमुअल गूजी ने दस्तावेज देरी से जमा किये जाने पर चिंता जताई लेकिन आवेदन पर विचार करने के लिए सहमति जता दी। इन दस्तावेजों में अधिकतर हीरा कारोबारी की कंपनियों से जुड़े बैंक दस्तावेज हैं।

भारत सरकार ने धन शोधन मामले में नीरव मोदी के खिलाफ और सबूत जमा किये

लंदन, 13 मई भारत सरकार ने बुधवार को भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ धोखधड़ी और धन शोधन के मामले में यहां की एक अदालत में सबूतों के तौर पर और दस्तावेज जमा किये। नीरव लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में अपने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है।

डिस्ट्रिक्ट जज सैमुअल गूजी ने दस्तावेज देरी से जमा किये जाने पर चिंता जताई लेकिन आवेदन पर विचार करने के लिए सहमति जता दी। इन दस्तावेजों में अधिकतर हीरा कारोबारी की कंपनियों से जुड़े बैंक दस्तावेज हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘संतुलित रुख अपनाते हुए मैं सबूत पेश किये जाने की अनुमति दे रहा हूं लेकिन इनका विश्लेषण करने के लिए समय देना होगा।’’

इससे प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई में और देरी हो सकती है। नीरव के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामले में अंतिम दलीलें अब दो भाग वाले मामले की निर्धारित दूसरी सुनवाई में दी जाएंगी जो सात सितंबर से पांच दिन तक चलेंगी।

इस सप्ताह सुनवाई शुरू में शुक्रवार को समाप्त होनी थी, लेकिन अब नीरव के वकीलों द्वारा एक अंतिम गवाह पेश किये जाने के बाद यह बृहस्पतिवार को पूरी हो सकती है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस मामले में सबूत, जो कि भारी-भरकम हैं, की प्रस्तुति स्पष्ट स्वरूप में नहीं हैं। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार दूसरी सुनवाई के लिए तैयारी करते समय इस पर सावधानी पूर्वक विचार करेगी।’’

भारतीय अधिकारियों की तरफ से अदालत में पक्ष रखते हुए क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने कहा था कि न्यायाधीश के लिए नये सबूत देखना जरूरी नहीं है लेकिन दस्तावेज मामले को स्पष्ट करने में मदद करते हैं और नीरव मोदी के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी के आरोपों में पहले कही गयी बात का समर्थन करते हैं।

लेकिन नीरव के बचाव दल ने दस्तावेज देरी से जमा किये जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे बहुत परेशानी वाला और अत्यंत विवादास्पद कदम करार दिया।

नीरव के बैरिस्टर क्लेयर मोंटगोमेरी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि हमारा मामला भारत सरकार के लिए हमारी परेशानियों की परीक्षा लेने वाला और कहीं से कुछ भी सबूत पेश करने वाला बन गया है।’’

प्रत्यर्पण सुनवाई के तीसरे दिन थोड़ी देर कामकाज बाधित रहा क्योंकि अदालत के समान दृश्य प्लेटफॉर्म (सीवीपी) तक लिंक के संपर्क में कुछ तकनीकी खामी आ गयी। बाद में इसे सही किया गया और बचाव पक्ष के दो गवाहों- थियेरी फ्रिच और भारत से न्यायमूर्ति अभय थिप्से ने वीडियो लिंक से अपनी गवाही दी। फ्रिच एक मशहूर फ्रांसीसी आभूषण विशेषज्ञ हैं।

नीरव मोदी की कंपनी के सलाहकार बोर्ड में 2015 से शामिल रहे फ्रिच ने नीरव की ईमानदारी और एक अच्छे उद्यमी के तौर पर कौशल का समर्थन किया। उन्होंने नीरव को एक रचनात्मक शख्स बताया जिसे भारत में लक्जरी ज्वेलरी के पहले अंतरराष्ट्रीय ब्रांड को स्थापित करने का जुनून सवार था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं (भारत में) कार्यशाला में कारीगरी से पूरी तरह प्रभावित था। मैंने दुनिया में कहीं इससे अच्छी गुणवत्ता नहीं देखी।

49 वर्षीय नीरव दक्षिण-पश्चिम लंदन में वैंड्सवर्थ जेल में अपने कमरे से वीडियो लिंक के माध्यम से अदालती कार्यवाही में शामिल हो रहा है। उसे पिछले साल मार्च में गिरफ्तार करने के बाद से जेल में रखा गया है।

वह पिछले साल से जमानत के बार-बार प्रयास कर चुका है लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया क्योंकि उसके देश छोड़कर भाग जाने का खतरा है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 13, 2020 10:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).