जरुरी जानकारी | प्रभावी नीतियों के साथ भारत, पांच कृषि उत्पाद निर्यातक देशों में शामिल हो सकता है: रिपोर्ट
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मुंबई, 29 जुलाई विश्व व्यापार केन्द्र (डब्ल्यूटीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार खेती पर ध्यान केंद्रित करने और किसानों को प्रभावी समर्थन देकर आगे बढ़ाने से, देश कृषि वस्तुओं के शीर्ष पांच निर्यातकों में शामिल हो सकता है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकार ने कृषि क्षेत्र में कुछ सुधारों की घोषणा की है ताकि किसानों को एपीएमसी की मंडियों के बाहर उपज बेचने की अनुमति मिल सके, और अन्य बातों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम को शिथिल किया गया है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
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डब्ल्यूटीसी की रिपोर्ट में वर्ष 2019 विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि वर्ष 2019 में 39 अरब डॉलर के वार्षिक कृषि उत्पादों के निर्यात के साथ, भारत का स्थान आठंवां था। भारत का स्थान यूरोपीय संघ (181 अरब डॉलर), अमेरिका (172 अरब डॉलर), ब्राज़ील (93 अरब डॉलर), चीन (83 अरब डॉलर), कनाडा (69 अरब डॉलर), इंडोनेशिया (46 अरब डॉलर) और थाईलैंड (44 अरब डॉलर) के बाद था।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘क्षमता निर्माण दिशा में केंद्रित हस्तक्षेप के माध्यम से, हम अपने कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ाते हुए थाईलैंड और इंडोनेशिया को पीछे छोड़कर दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश बन सकते हैं।’’
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अध्ययन में कहा गया है कि इस स्थिति को हासिल करने के लिए पहले कदम के रूप में, सरकार को अपने विस्तार केंद्रों की भूमिका पुनर्निधारित करना चाहिए - देश भर में 715 कृषि विज्ञान केंद्र - किसानों को उन फसलों की किस्मों को उगाने के लिए समर्थन प्रदान करें जिनकी वैश्विक स्तर पर बाजारों में मांग है।
अध्ययन में कहा गया है कि कई बार, भारतीय निर्यात खेपों को इसलिए ठुकरार दिया जाता है क्योंकि निर्धारित अधिकतम अवशिष्ट सीमा से ऊपर कीटनाशकों की उपस्थिति होती है। इसमें कहा गया है कि ‘‘कृषि विज्ञान केंद्रों को कीटनाशकों और अन्य रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर किसानों का मार्गदर्शन करना चाहिए ताकि भारतीय किसानों के उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो सकें।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद, हमें अपनी विस्तार सेवाओं की प्रणाली को पुनर्निधारित करने की जरूरत है, जिन्हें कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की ओर केंद्रित हरित क्रांति के दिनों में विकसित की गई थी।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब समय आ गया है कि हम मात्रा के साथ वैश्विक खाद्य बाजारों में गुणवत्ता की ओर बढ़ें।
इसमें कहा गया है कि इस दिशा में ध्यान का एक प्रमुख केन्द्र बागवानी फसलों की खेती हो सकती है जो विदेशों में स्वीकार्य गुणवत्ता, रंग, आकार और रासायनिक सामग्री की उपस्थिति के मानकों के अनुरूप हो या जो आगे के प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त हों।
फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद, वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत से कम है। खाद्य और कृषि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, पपीते, नींबू के सबसे बड़े उत्पादक होने के बावजूद, हम दुनिया के पपीते की मांग का 3.2 प्रतिशत, नींबू की मांग का 0.5 प्रतिशत हिस्सा मुश्किल से पूरा कर पाते हैं।
पिछले एक दशक में, भारत ने बासमती चावल, मांस और समुद्री उत्पादों के अलावा शिमला मिर्च, अरंडी का तेल, तंबाकू के अर्क और मीठे बिस्कुट जैसे वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति की है।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया, ‘‘ये सफल प्रयासों को अन्य संभावना रखने वाले खाद्य पदार्थों में दोहराई जानी चाहिये या इनऊें दोहराया जा सकता है।’’
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