जरुरी जानकारी | भारत चाहता है कि ईरान, वेनेजुएला से तेल आपूर्ति शुरू करने की अनुमति दे अमेरिका

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नयी दिल्ली, दो दिसंबर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को कहा कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश भारत चाहता है कि नई अमेरिकी सरकार ईरान और वेनेजुएला से तेल आपूर्ति फिर शुरू करने की अनुमति दे ताकि देश को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये ज्यादा विकल्प मिले।

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जोसेफ बाइडेन की अगुवाई वाली सरकार के अंतर्गत ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात फिर शुरू होने की उम्मीद से जुड़े सवाल के जवाब में प्रधान ने कहा, ‘‘खरीदार के रूप में, मैं चाहूंगा कि खरीद के लिये और जगह हों। मैं चाहूंगा कि तेल खरीद के लिये और विकल्प मौजूद हों।’’

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भारत के लिये ईरान 2020-11 तक कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। लेकिन संदिग्ध परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की पाबंदी के कारण वहां से आयात कम होता गया।

अमेरिका के ईरान पर मई 2019 में आर्थिक पाबंदियां फिर से लगाये जाने के बाद भारत ने वहां से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया।

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वेनेजुएला की बात की जाए तो यह भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। लेकिन अमेरिका के वेनेजुएला की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी पीडीवीएसए पर जनवरी 2019 में पाबंदी लगाये जाने के बाद आयात कम हुआ है। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बनाने के लिये यह कदम उठाया।

‘आत्मनिर्भर भारत का रास्ता’ विषय पर स्वराज मैगजीन के वेबिनार (इंटरनेट के जरिये आयोजित कार्यक्रम) में प्रधान से यह पूछा गया था कि क्या भारत जैसा तेल का बड़ा उपभोक्ता देश चाहेगा कि बाइडेन प्रशासन ईरान और वेनेजुएला पर पाबंदी में ढील दे।

भारत-अमेरिकी संबंधों के बारे में मंत्री ने कहा कि अमेरिका में सरकार बदलने से भारत के साथ उसके संबंधों के मामले में कुछ नहीं बदलेगा। ‘‘दोनों देशों के बीच रिश्ते प्रगाढ़ हैं। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हमारा संबंध मजबूत है।’’

प्रधान ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। भले ही सरकार डेमोक्रेट की हो या फिर रिपिब्लिकन की।

उल्लेखनीय है कि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिये 85 प्रतिशत आयात पर निर्भ्रर है। दो तिहाई आयात पश्चिम एशिया से होता है। इराक और सऊदी अरब सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं।

प्रधान ने यह भी कहा कि भारत युक्तिसंगत और उचित कीमत व्यवस्था का समर्थक रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘एकाधिकार अब बीते दिनों की बात है। तेल उत्पादकों को ग्राहकों की आकांक्षाओं को देखना होगा। यह उपभोक्ता केंद्रित बाजार है। भारत युक्तिसंगत और उचित मूल्य का हिमायती है।’’

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