नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर वाहन विनिर्माता निसान मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक राकेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि भारत को स्वच्छ वातावरण के लिए वाहनों की लंबाई और इंजन के आकार के बजाय उत्सर्जन के आधार पर यात्री वाहनों (पीवी) पर कर लगाने के बारे में सोचना चाहिए।
श्रीवास्तव ने कहा कि वाहन के माध्यम से फैलने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हाइब्रिड जैसी तकनीकों पर भी विचार किया जाना चाहिए। श्रीवास्तव ने यहां एक बातचीत में कहा, ''हम उत्सर्जन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कर स्लैब रख सकते हैं।''
उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही चार मीटर से कम लंबी, चार मीटर से अधिक लंबी गाड़ियों और अलग-अलग ईंधन के आधार पर अलग-अलग कर ढांचा लागू करती है।
जीएसटी व्यवस्था के तहत, कारों पर 28 प्रतिशत का उच्चतम कर स्लैब लगता है। इसके अलावा उसके ऊपर एक उपकर लगाया जाता है।
साथ ही, देश में हाइब्रिड वाहनों पर जीएसटी समेत कुल कर 43 प्रतिशत है, जबकि बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगभग पांच प्रतिशत का कर लगता है।
श्रीवास्तव ने कहा, ''मुझे लगता है कि उत्सर्जन स्तरों के आधार पर बाजार में प्रोत्साहन की ओर ध्यान दिया जाए, जिससे एक स्वच्छ और हरित वातावरण हो सके।''
इसके साथ ही निसान एक्स-ट्रेल समेत अपने वैश्विक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों (एसयूवी) को भारतीय बाजार में उतारने की भी योजना बना रही है। निसान इंडिया के अध्यक्ष फ्रैंक टॉरेस ने कहा कि कंपनी देश में अपनी उपस्थिति को मजबूत करना चाहती है।
कंपनी देश में एक्स-ट्रेल, ज्यूक और कश्काई जैसे मॉडलों को उतारना चाहती है। कंपनी वर्तमान में देश में मैग्नाइट और किक्स जैसे मॉडल बेचती है। भारतीय सड़कों पर एक्स-ट्रेल और कश्काई के लिए परीक्षण शुरू हो चुका है।
टॉरेस ने कहा, ''भारतीय बाजार में असीम संभावनाएं हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम आधुनिक भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप सर्वोत्तम वाहन पेश करें।''
उन्होंने कहा कि भारत में मैग्नाइट की सफलता के बाद अब कंपनी की एसयूवी पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाने की योजना है।
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