विदेश की खबरें | भारत ने एक 'अच्छा उदाहरण' पेश किया, कोविड-19 महामारी के बीच भी सौर नीलामियों को मिली लोकप्रियता: संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र, नौ जुलाई संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने अक्षय ऊर्जा की दिशा में काम करके एक ‘‘अच्छा उदाहरण’’ पेश किया है, जहां कोविड-19 महामारी के बीच भी सौर नीलामियों ने लोकप्रियता हासिल की है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि अक्षय ऊर्जा ही एकमात्र ऊर्जा स्रोत है, जिसकी 2020 में बढ़ने की उम्मीद है और यह ऐसा क्षेत्र है जहां जीवाश्म ईंधन उद्योग की तुलना में अधिक रोजगार के अवसर है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के ‘स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन शिखर सम्मेलन’ में दिये अपने संबोधन में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुतारेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे कोई नया कोयला न लें और विकासशील दुनिया में कोयले के सभी बाहरी वित्तपोषण को समाप्त करें।

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उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 से निपटने की योजनाओं में कोयले का कोई स्थान नहीं है। राष्ट्रों को 2050 तक बिल्कुल शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए और अगले साल सीओपी-26 से पहले अधिक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को प्रस्तुत करना चाहिए।’’

गुतारेस ने कहा, ‘‘परिवर्तन के बीज यहां हैं। नवीनीकरणीय ऊर्जा एकमात्र ऊर्जा स्रोत है जिसकी 2020 में बढ़ने की उम्मीद है। महामारी के प्रकोप के बीच भी सौर नीलामियों ने लोकप्रियता हासिल की है। भारत ने एक अच्छा उदाहरण पेश किया है। नवीनीकरणीय ऊर्जा जीवाश्म ईंधन उद्योग की तुलना में तीन गुना अधिक रोजगार प्रदान करती है।’’

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पिछले महीने, अडानी ग्रीन एनर्जी ने कहा था कि उसने देश में 8 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता और 2 गीगावाट उपकरण विनिर्माण सुविधा विकसित करने के लिए भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) से 45,000 करोड़ रुपये के विनिर्माण संबंधित सौर अनुबंध हासिल किया है, जो अपनी तरह की पहली परियोजना है।

गुतारेस ने कहा कि उन्होंने सभी देशों से जलवायु को लेकर छह सकारात्मक कार्यों पर विचार करने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने समाजों को अधिक लचीला बनाने की आवश्यकता है। हमें हरित रोजगार और सतत विकास की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि देशों को जीवाश्म ईंधन सब्सिडी पर पैसा बर्बाद करने से बचने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देशों को अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया में जलवायु जोखिम पर भी विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हर वित्तीय निर्णय लेने के दौरान पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का ध्यान रखना चाहिए। कुल मिलाकर, हमें साथ काम करने की जरूरत है।’’

कृष्ण

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