देश की खबरें | भारत, रूस ने चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार-विमर्श किया

नयी दिल्ली/व्लादिवोस्तोक, 13 सितंबर भारत और रूस ने व्लादिवोस्तोक और चेन्नई के बीच उत्तरी समुद्री मार्ग और पूर्वी समुद्री गलियारे जैसे नए परिवहन गलियारों का इस्तेमाल करने की संभावना पर बुधवार को विचार-विमर्श किया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्ष व्लादिवोस्तोक में प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित रूसी समुद्री प्रशिक्षण संस्थान में ध्रुवीय और आर्कटिक जल में भारतीय नाविकों को प्रशिक्षित करने पर सहमत हुए।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल 10-13 सितंबर तक रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक में आयोजित आठवीं पूर्वी आर्थिक मंच की बैठक में भाग ले रहे हैं।

बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने उत्तरी समुद्री मार्ग के साथ-साथ पूर्वी समुद्री मार्ग जैसे नए परिवहन गलियारों के इस्तेमाल की संभावना सहित समुद्री सहयोग को व्यापक बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

इसके अनुसार, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और सुदूर पूर्व एवं आर्कटिक के विकास मामलों के रूसी संघ के मंत्री ए. ओ. चेकुनकोव के बीच समुद्री सहयोग पर चर्चा हुई।

इस मौके पर सोनोवाल ने कहा कि रूस और भारत के बीच संबंधों की गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं और यह आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि भारत उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास के संबंध में एक साझेदारी पर सहयोग करने का इच्छुक है ताकि संपर्क (कनेक्टिविटी) और व्यापार को बढ़ावा मिल सके।

रूसी मंत्री चेकुनकोव ने कहा कि दोनों पक्षों ने समुद्री संचार के विकास के साथ-साथ उत्तरी समुद्री मार्ग के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

अनुमान है कि पूर्वी समुद्री गलियारे से सुदूर पूर्व क्षेत्र के भारतीय और रूसी बंदरगाहों के बीच माल परिवहन में लगने वाला समय 16 दिन तक कम हो जाएगा। भारत से यूरोप के रास्ते सुदूर पूर्व रूस तक माल पहुंचाने में लगने वाला समय वर्तमान में लगने वाले 40 दिन से अधिक की तुलना में घटकर 24 दिन रह जाएगा।

चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग (ईएमसी) लगभग 5,600 समुद्री मील की दूरी तय करेगा।

मंच की बैठक में चीन, लाओस, मंगोलिया और दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) देशों के प्रतिनिधिमंडल भी भाग ले रहे हैं।

व्लादिवोस्तोक प्रशांत महासागर पर सबसे बड़ा रूसी बंदरगाह है और यह चीन-रूस सीमा से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है।

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