नयी दिल्ली, 11 फरवरी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि भारत एक स्थायी परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देते हुए आर्थिक विकास को उत्सर्जन से अलग करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
दुबई में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान परिवहन के भविष्य विषय पर आयोजित एक गोलमेज बैठक में यादव ने कहा कि भारत ने पिछले साल परिवहन उद्योग में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जिससे वैश्विक नवाचार और विनिर्माण केंद्र के रूप में उसकी स्थिति मजबूत हुई।
साल 2070 तक “शुद्ध शून्य उत्सर्जन” का लक्ष्य हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने इस दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं, जो उसके विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
यादव ने कहा, “भारत सरकार अपनी दीर्घकालिक निम्न कार्बन विकास रणनीति हासिल करने के लिए सक्रिय नीतिगत पहल कर रही है और रूपरेखा विकसित कर रही है। इस रणनीति में एक एकीकृत, समावेशी और कुशल परिवहन प्रणाली विकसित करने के साथ ही कई अन्य प्रमुख बदलावों को लागू करना शामिल है।”
उन्होंने कहा कि यह रणनीति टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन के स्तर में कमी लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
यादव ने बताया कि भारत ने 25,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक नयी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत वैश्विक ईवी कंपनियों से निवेश आकर्षित करने और भारत को उन्नत ईवी के लिए एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के वास्ते विभिन्न प्रोत्साहन की घोषणा की गई है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि टिकाऊ परिवहन को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकार ने पीएम ई-ड्राइव नामक 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन योजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि शहरी बस सेवाओं में सुधार के लिए शुरू की गई पीएम ई-बस सेवा योजना का लक्ष्य देश भर में 10,000 इलेक्ट्रिक बस उतारना है।
यादव ने राष्ट्रीय सतत आवास मिशन (एनएमएसएच) और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जो शहरी क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर रही हैं।
सेमीकंडक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि भारत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहा है।
यादव ने कहा कि 76,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया योजना का लक्ष्य सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण तंत्र विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर उत्पादन, डिस्प्ले निर्माण और डिजाइन में निवेश करने वाली कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
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