नयी दिल्ली, चार जनवरी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र के आसपास स्थिति सामान्य बनाने का प्रयास किया और मास्को एवं कीव के बीच खाद्यान्न समझौते में मदद की।
विदेश मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि रूस से सस्ता तेल खरीद कर भारत युद्ध का फायदा उठा रहा है।
जयशंकर ने रूसी कच्चे तेल की कीमतों की सीमा तय करने को पश्चिमी देशों का फैसला करार दिया, जो भारत के साथ विचार-विमर्श के बिना लिया गया था। उन्होंने कहा कि भारत स्वत: उन चीजों को स्वीकार नहीं कर सकता है, जो दूसरे तय करते हों।
आस्ट्रिया के ‘डाई प्रेस’ को दिये साक्षात्कार में जयशंकर ने यूक्रेन संकट के बारे में एक सवाल के जवाब में स्थिति को सामान्य बनाने में योगदान देने की तैयारी का संकेत दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘ अगर हम मदद कर सकते हैं, तो हम इसके लिये तैयार हैं। और हमने पहले भी मदद की है... उदाहरण के तौर पर खाद्यान्न समझौते के लिए। हमने जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र के आसपास स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया।’’
यह पूछे जाने पर क्या मध्यस्थता में मुख्य भूमिका निभाने का श्रेय पहले ही तुर्किये ले चुका है, जयशंकर ने कहा, ‘‘ नहीं, लेकिन सवाल यह नहीं है कि मध्यस्थता का श्रेय किसे मिलता है और कौन सुर्खियां बटोरता है।’’
रूस से भारत द्वारा सस्ती दर पर ऊर्जा खरीद से जुड़े सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह इस बात को राजनीतिक रूप से और गणितीय रूप से भी खारिज करते हैं कि भारत युद्ध का फयदा उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं तथा तेल बाजार पर ईरान पर लगे प्रतिबंध और वेनेजुएला में होने वाले घटनाक्रमों का भी असर पड़ता है।
दीपक
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