नयी दिल्ली, चार दिसंबर भारत को अब तक 'चीन प्लस वन रणनीति' को अपनाने में सीमित सफलता मिली है, जबकि वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया को इसका बड़ा फायदा मिला है। सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
इसमें कहा गया कि सस्ता श्रम, सरल कर कानून, कम शुल्क और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने में तेजी जैसे कारकों से इन देशों को अपनी निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिली।
अमेरिका ने चीन की वृद्धि और तकनीकी प्रगति पर होने वाले खर्च को सीमित करने के लिए चीनी वस्तुओं पर सख्त निर्यात नियंत्रण और उच्च शुल्क लागू किए हैं।
नीति आयोग की रिपोर्ट - 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' में कहा गया है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ा बदलाव आया और बहुराष्ट्रीय निगमों को चीनी विनिर्माण का विकल्प तलाशना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ''हालांकि, भारत को अब तक 'चीन प्लस वन रणनीति' को अपनाने में सीमित सफलता मिली है।'' हाल के वर्षों में श्रम-सघन क्षेत्रों के वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी घटी है।
इसमें कहा गया कि भारत को प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की जरूरत है।
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