देश की खबरें | ऑक्सफ़ोर्ड के कोविड-19 टीके के परीक्षण के सकारात्मक नतीजों से भारत को उम्मीद; अन्य टीकों की तुलना में बेहतर विकल्प

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कम मूल्य और अधिक तापमान पर भी भंडारण होने की विशेषता को देखते हुए, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का कोविड-19 टीका भारत के लिए अधिक अनुकूल है और यह मॉडर्ना, फाइजर या स्पूतनिक वी जैसे टीके की तुलना में अधिक व्यवहार्य विकल्प है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रस्तुत डेटा अभी प्रारंभिक स्तर के हैं, इसलिए अभी इसका पूर्ण विश्लेषण कर पाना मुश्किल है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 नवंबर कम मूल्य और अधिक तापमान पर भी भंडारण होने की विशेषता को देखते हुए, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का कोविड-19 टीका भारत के लिए अधिक अनुकूल है और यह मॉडर्ना, फाइजर या स्पूतनिक वी जैसे टीके की तुलना में अधिक व्यवहार्य विकल्प है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रस्तुत डेटा अभी प्रारंभिक स्तर के हैं, इसलिए अभी इसका पूर्ण विश्लेषण कर पाना मुश्किल है।

कई वैज्ञानिकों ने मंगलवार को कहा कि इसको लेकर बहुत उम्मीद की जा रही है और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का टीका फिलहाल शुरुआत करने के लिए एक अच्छा विकल्प है, लेकिन यह याद रखना भी महत्वपूर्ण है कि ये आंकड़े अस्थायी हैं और इसको लेकर एक पूर्ण विश्लेषण करना अभी मुश्किल है।

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प्रमुख फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने सोमवार को घोषणा की कि ब्रिटेन और ब्राजील में इसके कोविड-19 टीके के नैदानिक ​​परीक्षणों के अंतरिम विश्लेषण से पता चला है कि यह औसतन 70 प्रतिशत प्रभावी है।

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से निर्मित होने वाला सीएचएडीओएक्स1 एनकोव-2019 टीका, तीसरे चरण के ​​परीक्षण के दौरान 70.4 प्रतिशत प्रभावी पाया गया। प्रतिभागियों को इसकी दो खुराक दिए जाने के बाद सामने आए डेटा को मिलाया गया, तो यह नतीजा सामने आया। हालांकि, दो अलग-अलग खुराक में, टीके का प्रभाव एक में 90 प्रतिशत, और दूसरे में 62 प्रतिशत रहा।

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‘ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप’ के निदेशक और ‘ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल’ के मुख्य जांचकर्ता एंड्रयू पोलार्ड ने कहा, ‘‘इन निष्कर्षों से पता चलता है कि हमारे पास एक प्रभावी टीका है जो अनेक लोगों की जान बचाएगा। उत्साहजनक रूप से, हमने पाया है कि हमारी खुराक में से एक लगभग 90 प्रतिशत प्रभावी हो सकती है।’’

हालांकि विषाणु विज्ञानी उपासना रे ने कहा, ‘‘हमें खुश होना चाहिए लेकिन सतर्क भी रहना चाहिए।’’

कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी की वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि अंतरिम परिणाम आशाजनक दिखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा इसकी पूर्ण समीक्षा की रिपोर्ट के बिना इसका पूरी तरह से विश्लेषण करना मुश्किल होगा।

रे ने पीटीआई- से कहा, ‘‘अभी इसे लेकर जानकारी की कमी है कि क्यों कम खुराक ने बेहतर प्रभावी परिणाम दिए या शून्य से नीचे तापमान पर भंडारण की स्थिति के बिना इस टीके को रेफ्रिजरेटर में कब तक संग्रहीत किया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षण पूरा होने के बाद इसके परिणाम बदल भी सकते हैं।’’

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