नयी दिल्ली, छह जुलाई भारत ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए सोमवार को एक समावेशी, "अफगान-नीत, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित" सुलह प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया।
भारत ने अफगानिस्तान के क्षेत्रीय भागीदारों की एक ऑनलाइन बैठक के दौरान यह जोर दिया।
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विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक की अध्यक्षता अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी ने की थी। बैठक में संयुक्त राष्ट्र सहित बीस देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार गनी ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में अफगानिस्तान को सहयोग देने और क्षेत्र में समन्वित प्रयासों के लिए दक्षेस नेताओं की बैठक की मेजबानी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।
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इसमें कहा गया है कि तीन अरब अमेरिकी डालर से अधिक की प्रतिबद्धता के साथ अफगानिस्तान के सबसे बड़े विकास भागीदारों में से एक भारत ने बैठक में एक समावेशी, अफगान-नीत, अफगान-स्वामित्व वाली व अफगान-नियंत्रित शांति और सुलह प्रक्रिया के महत्व को दोहराया।
बयान के अनुसार "भारत ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति हासिल करने के लिए, आतंकवादियों की पनाहगाहों और सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करना एक जरूरी आवश्यकता है।"
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में एक संवैधानिक व्यवस्था के लिए समर्थन व्यक्त किया जिसमें महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों सहित अफगान समाज के सभी तबकों के हितों की रक्षा हो सकेगी।
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