चेन्नई, 14 जुलाई तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने शुक्रवार को कहा कि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के भारतीय जनता पार्टी सरकार के प्रयास का कड़ा विरोध करेगी।
यहां द्रमुक के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों की बैठक में पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत और इसका संविधान केंद्र में भाजपा का एक और कार्यकाल ‘‘सहन’’ नहीं कर पायेगा क्योंकि भाजपा ने खरीद-फरोख्त संस्कृति (विधायकों और सांसदों की ‘खरीद’) के ‘‘नायक’’ के रूप में उभरकर दल-बदल विरोधी कानून को सिर्फ ‘‘दिखावटी’’ बना दिया है।
महाराष्ट्र में अजित पवार और उनके समर्थकों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को हाल में विभाजित कर दिया था और वे राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गठबंधन के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गये थे।
द्रमुक अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की अध्यक्षता में हुई बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि देश संविधान की प्रस्तावना में निहित ‘‘समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य’’ के आदर्शों को हटाये जाने को लेकर ‘‘बड़े खतरे’’ का सामना कर रहा है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगा।
द्रमुक ने फैसला किया है कि संसद में उसके सांसद केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार का विरोध करेंगे जो यूसीसी और अन्य जनविरोधी विधेयकों को ‘‘जल्दबाजी में लाने पर आमादा’’ है।
मणिपुर का जिक्र करते हुए द्रमुक ने कहा कि इस पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा की आग अभी तक नहीं बुझी है और ‘‘आज देश में नफरत की राजनीति की आग भड़क रही है।’’
पार्टी ने कई चिंताओं के बीच सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ बेरोजगारी के मुद्दे को भी उठाया।
प्रस्ताव में कहा गया है कि सामाजिक न्याय, समानता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र जैसे आदर्शों से भारत का विदेश में गौरव बढ़ता है लेकिन आज इनका महत्व खो गया है।
इसमें कहा गया है कि संविधान और उसे बनाये रखने वाली न्यायपालिका को अपनी सीमा लांघने वाली केंद्र सरकार से ‘‘खतरे’’ का सामना करना पड़ रहा है।
प्रस्ताव में दावा किया गया है कि पिछले नौ वर्षों में, केंद्र की भाजपा सरकार ने तमिलनाडु को न तो आर्थिक मदद दी और न ही परियोजनाएं दीं और केंद्र सरकार की नौकरियों में राज्य के युवाओं के लिए कोई जगह नहीं है।
द्रमुक ने भाजपा पर यह ‘‘भ्रामक धारणा’’ फैलाने का भी आरोप लगाया कि वह तमिल से प्रभावित है और दावा किया कि केंद्र ने तमिल युवाओं को तमिल में प्रतियोगी परीक्षाएं लिखने का मौका नहीं दिया।
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