देश की खबरें | भारत, आसियान की रणनीतिक साझेदारी साझा ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक धरोहर पर आधारित : मोदी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और आसियान देशों के बीच स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के लिए दृष्टिकोण के मेल की वकालत की।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 नवंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और आसियान देशों के बीच स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के लिए दृष्टिकोण के मेल की वकालत की।

चीन के विस्तारवादी रवैये के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र ने विश्व के देशों का ध्यान आकर्षित किया है।

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में भारत और आसियान देशों ने दक्षिण चीन सागर को लेकर भी चर्चा और क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा के महत्व के अलावा समुद्री और हवाई मार्ग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का भी अनुमोदन किया।

सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए 2021-2025 के लिए नये आसियान-भारत ‘‘कार्य योजना’’ को अंगीकार किए जाने का भी स्वागत किया गया।

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प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में कोविड-19 के लिए आसियान प्रतिक्रिया कोष में 10 लाख अमेरिकी डॉलर के योगदान की भी घोषणा की और इस महामारी के खिलाफ दोनों पक्षों में मजबूत सहयोग पर बल दिया।

सत्रहवें आसियान-भारत शिखर बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि ‘‘आसियान’’ की रणनीतिक साझेदारी साझा ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक धरोहर पर आधारित है तथा यह समूह शुरू से ही भारत की ‘‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’’ का मूल केंद्र रहा है। वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक के साथ मोदी ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में मोदी ने कहा, ‘‘भारत और आसियान के बीच आर्थिक, सामाजिक, डिजिटल, वित्तीय और समुद्री हर प्रकार के संपर्क को बढ़ाना हमारे लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है। पिछले कुछ सालों में हम इन सभी क्षेत्रों में क़रीब आते गए हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल और आसियान के हिंद-प्रशांत पर दृष्टिकोण के बीच कई सारी समानताएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘शुरूआत से ही आसियान समूह हमारी ‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का मूल केंद्र रहा है। भारत और आसियान की रणनीतिक भागीदारी हमारी साझा ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है।’’

यह सम्मेलन बृहस्पतिवार को कोविड-19 महामारी की वजह से ऑनलाइन माध्यम के जरिये शुरू हुआ, जिसके शुरुआती सत्र में वियतनाम के प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित किया।

दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साल में दो बार होने वाले सम्मेलन में इस साल वियतनाम अध्यक्ष है।

कोविड-19 की समस्या इतनी विकट है कि इसकी वजह से कंबोडिया का प्रतिनिधित्व वहां के उप प्रधानमंत्री कर रहे हैं क्योंकि देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हुन सेन संक्रमित मंत्री के संपर्क में आने की वजह से पृथकवास में हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने इस साल उत्पन्न अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया। उनका संबोधन सदस्य देशों के नेताओं ने अपने-अपने देश में सीधे प्रसारण के जरिये सुना।

फुक ने करीब 200 वियतनामी अधिकारियों और विदेशी राजनयिकों के समक्ष कहा, ‘‘इस साल शांति और सुरक्षा अधिक खतरे का सामना कर रही है क्योंकि देश और प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ताकत के अपूर्वानुमेय व्यवहार का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह तनाव अंतरराष्ट्रीय बहुस्तरीय व्यवस्था के लिए खतरा है, गैर पारंपरिक सुरक्षा मुद्दा और कट्टरपंथ का उदय भी चुनौती है।’’

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कोविड-19 महामारी को 2020 की निर्णायक चुनौती बताते हुए सम्मेलन में कहा कि टीका उपलब्ध होने पर आसियान देशों को अपने लोगों तक इसकी निर्बाध, तेजी से और किफायती स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

ली ने प्रत्येक व्यक्ति तक टीका की पहुंच का आह्वान किया और महामारी के दूरगामी असर को कम करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की महत्ता पर जोर दिया।

‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ अखबार ने ली के हवाले से कहा है, ‘‘हमारे विदेशी भागीदार और आसियान के सदस्य राष्ट्र भी टीका विकसित कर रहे हैं। हमारे क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें टीका के उत्पादन और वितरण पर उनके साथ काम करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि सिंगापुर कोविड-19 टीका को लेकर वैश्विक पहल का समर्थन करता है, जिसके सदस्यों में आसियान के देश भी शामिल हैं ।

आसियान के सदस्यों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलिपीन, वियतनाम, म्यांमा, कंबोडिया, ब्रूनेई और लाओस है। विवादित दक्षिण चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में चीन के आक्रामक रवैये के बीच इस शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ है। दक्षिण चीन सागर में आसियान के कई देशों के साथ चीन का विवाद चल रहा है।

अपने संबोधन के दौरान ली ने कोविड-19 आसियान कार्रवाई कोष के लिए सिंगापुर की तरफ से एक लाख डॉलर का योगदान देने की घोषणा की। इस कोष के जरिए सदस्य राष्ट्रों को महामारी से मुकाबले के लिए चिकित्सा आपूर्ति और उपकरण खरीदने में मदद की जाती है। ली ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर नेताओं को कोविड-19 के बाद के समय में आसियान की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कोविड-19 को 2020 के लिए निर्णायक चुनौती बताया।

उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार की बैठक में चीन, दक्षिण कोरिया और भारत के नेताओं के साथ अलग से सम्मेलन का कार्यक्रम है। आसियान के नेताओं का जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदो सुगा के साथ भी यह पहला सम्मेलन होगा।

ब्रजेन्द्र

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