जरुरी जानकारी | भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौते की बेहतर परिणाम के लिये तत्काल समीक्षा की जरूरत: पुरी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत-आसियान के बीच वस्तु व्यापार पर हुये समझौते की तत्काल समीक्षा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे भारत तथा दस दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के इस समूह के बीच द्विपक्षीय व्यापार की वास्तविक संभावनाओं का पता चल सकेगा।

नयी दिल्ली, चार अगस्त केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत-आसियान के बीच वस्तु व्यापार पर हुये समझौते की तत्काल समीक्षा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे भारत तथा दस दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के इस समूह के बीच द्विपक्षीय व्यापार की वास्तविक संभावनाओं का पता चल सकेगा।

भारत-आसियान के बीच वस्तुओं के व्यापार पर हुये समझौते की समीक्षा लंबित है।

यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: लॉकडाउन में फंसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, जारी की गई अधिसूचना.

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजि एक आभासी सम्मेलन में कहा, ‘‘समझौते की तत्काल समीक्षा और आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रभावी कार्यान्वयन से दोनों पक्षों द्वारा 2020 के लिए निर्धारित 200 अरब अमरीकी डालर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।’’

पुरी ने कहा कि एफटीए की समीक्षा से भागीदार देशों को उपलब्ध संभावनाओं को साकार करने के अवसर मिलेंगे।

यह भी पढ़े | तमिलनाडु: ऑनलाइन क्लासेस के लिए स्मार्टफोन न मिलने पर 10वीं कक्षा के छात्र ने कथित तौर पर की आत्महत्या.

सरकार ने पिछले साल नवंबर में संसद को बताया था कि भारत और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की समीक्षा के प्रस्तावित दायरे में सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, वस्तुओं के व्यापार आगे और उदारीकरण तथा आंकड़ों के आदान-प्रदान जैसे मुद्दों को शामिल किया जा सकता है।

दस देशों के समूह आसियान और भारत के बीच वस्तु व्यापार समझौते पर 13 अगस्त 2009 को हस्ताक्षर हुए और यह एक जनवरी 2010 को लागू हुआ।

दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों के संघ (आसियान) के सदस्यों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, म्यांमा, कंबोडिया, ब्रुनेई और लाओस शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान दोनों को ही ई- वाणिज्य, आईटी संबद्ध सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, बैंकिंग और पर्यटन जैसे सेवा क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दोगुने प्रयास करने की जरूरत है।

उन्होंने कहाा कि आसियान के साथ भारत का सालाना व्यापार घाटा 24 अरब उालर के करीब है। ‘‘इसके कई कारण हैं और मैं चाहता हूं कि आने वाले महीनों और सालों में यह घाटा कम होना चाहिये। ’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\