देश की खबरें | भारत और ब्रिटेन ने साइबर क्षेत्र में नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की
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नयी दिल्ली, 22 अप्रैल भारत और ब्रिटेन ने साइबर अपराध के आधुनिक खतरों के मद्देनजर आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और साथ ही इस बात पर जोर दिया कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था उसी प्रकार से ‘आनलाइन’ रूप में बनी रहनी चाहिए जैसे कि यह ‘आफलाइन’ जरूरी है।
मोदी और जॉनसन के बीच वार्ता के बाद विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने संवाददाताओं को बताया कि दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा के विषय पर एक पृथक बयान भी जारी किया गया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बयान में कहा गया है कि मई 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बीच विस्तारित साइबर सुरक्षा गठजोड़ को लेकर सहमति बनी थी तथा आज भारत और ब्रिटेन ने इस गठजोड़ को अमल में लाने के लिये सहयोग के एक संयुक्त कार्यक्रम के बारे में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की । इसमें साइबर प्रतिरोध एवं क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
साइबर सुरक्षा संबंधी बयान में कहा गया है कि ‘नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था उसी प्रकार से ‘आनलाइन’ रूप में बनी रहनी चाहिए जैसे यह ‘आफलाइन’ है।’
इसमें कहा गया है कि, ‘‘ भारत और ब्रिटेन (कई) देशों एवं उनके छद्म रूपों द्वारा साइबर क्षेत्र में दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों को अंजाम देने की बढ़ती इच्छा.. साइबर क्षेत्र में एक जिम्मेदार देश के व्यवहार संबंधी चिन्हित नियमों के प्रतिकूल है।''
इसमें कहा गया है कि दोनों देश साइबर अपराधों से बढ़ते खतरे एवं इससे निपटने को लेकर सहयोग एवं समन्वय को प्रगाढ़ बनायेंगे ।
इसमें कहा गया है कि भारत और ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के समक्ष खतरों को कम करने के लिये जिम्मेदार देश के रूप में नियमों का स्वैच्छिक रूप से पालन करने की भूमिका को महत्व देते हैं जैसा कि 2021 के संयुक्त राष्ट्र के सरकारी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कहा गया है।
दोनों देशों ने कहा कि हम साइबर उपकरणों का इस्तेमाल जानबूझकर महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचाने पर रोक लगाने तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी से जुड़ी दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों से निपटने की दिशा में उपयुक्त प्रतिक्रिया देने के आग्रह के बारे में ध्यान आकृष्ट करते हैं ।
इसमें कहा गया है कि, ‘‘ भारत और ब्रिटेन साझा, लचीले साइबर सहयोग को बढ़ाने और समग्र समाज दृष्टिकोण को लेकर काम करेंगे । हम साझा खतरों की संयुक्त रूप से पहचान करेंगे और इस दिशा में सार्वजनिक निजी साझेदारी को प्रोत्साहित करेंगे । ’’
दोनों ने देशों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल युग की चुनौतियों से सरकारें अकेले नहीं निपट सकती और नयी प्रौद्योगिकियों के विकास एवं अनुपालन में निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
दीपक
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