देश की खबरें | भारत और संयुक्त अरब अमीरात को सेवा समझौते के बजाय खुली आकाश नीति रखनी चाहिए : राजदूत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ सितंबर भारत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजदूत अहमद अल बन्ना ने बुधवार को कहा कि आपस में विमानन सेवा समझौते के बजाय दोनों देशों को खुली आकाश नीति रखनी चाहिए क्योंकि इस कदम से दोनों ही देशों की एयरलाइंस लाभान्वित होंगी।

अल बन्ना ने एक वेबीनार में कहा कि संयुक्त अरब अमीरात भारत का भरोसेमंद सहयोगी है और उसकी निवेश प्रतिबद्धता भारत की आर्थिक वृद्धि में उसके विश्वास की गवाही देती है।

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उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात भारत में सबसे बड़ा अरब निवेशक है और यहां कुल अरब निवेश का 85 फीसद हिस्सा यूएई का है।

अल बन्ना ने दिल्ली स्टडी ग्रुप के अध्यक्ष विजय जौली द्वारा आयोजित वेबीनार में कहा, ‘‘कई क्षेत्रों में विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं। संयुक्त अरब अमीरात भारत का विशेष आर्थिक सहयोगी बनना चाहता है और हम विभिन्न स्तरों पर सुधार के लिए भारत के साथ घनिष्टता से काम करना चाहते हैं।’’

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उन्होंने कहा कि सबसे अहम पहलुओं में एक विमान संपर्क में सुधार है जो आर्थिक गति को रफ्तार देने वाला एक अन्य उत्प्रेरक है और इससे व्यापार एवं पर्यटन में सुगमता आएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच हमारे पास फिलहाल 1068 उड़ानें हैं। जो भारतीय, भारत से बाहर जाते हैं, उनमें 50 से 55 फीसद से अधिक दुबई और अबू धाबी को अपने पारगमन बिंदु के रूप में इस्तेमाल करते हैं।’’

अल बन्ना ने कहा, ‘‘ सीटों के सदंर्भ में विमानन सेवा समझौते की अपनी एक सीमित क्षमता है, उसके बजाय हमें खुली आकाश नीति पर गौर करने की जरूरत है।’’

खुली आकाश नीति समझौते से दोनों देशों की एयरलाइंस एक दूसरे के क्षेत्राधिकार में असीमित संख्या में उड़ानों को संचालित कर सकती हैं और इसमें सीटों की संख्या पर भी कोई रोक नहीं होगी।

भारत ने अमेरिका, यूनान, जमैका, गुयाना, फिनलैंड, स्पेन और श्रीलंका तथा कुछ अन्य देशों के साथ खुली आकाश नीति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हुए हैं।

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