देश की खबरें | अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये शोध और नवाचार में निवेश बढ़ाएं : राष्ट्रपति कोविंद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दूसरे देशों की तुलना में शोध और नवाचार में कम निवेश को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों को शोध तथा नवाचार में निवेश का प्रतिशत बढ़ाना होगा ताकि भारत जैसी बड़ी और जीवंत अर्थ-व्यवस्था को गति प्रदान की जा सके ।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात सितंबर दूसरे देशों की तुलना में शोध और नवाचार में कम निवेश को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों को शोध तथा नवाचार में निवेश का प्रतिशत बढ़ाना होगा ताकि भारत जैसी बड़ी और जीवंत अर्थ-व्यवस्था को गति प्रदान की जा सके ।

नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह देखा गया है कि रिसर्च और इनोवेशन में निवेश का स्तर अमेरिका में जीडीपी का 2.8 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया में 4.2 प्रतिशत और इज़राइल में 4.3 प्रतिशत है जबकि भारत में यह केवल 0.7 प्रतिशत है।

यह भी पढ़े | कुशीनगर: टीचर की गोली मारकर हत्या, गुस्साई भीड़ ने आरोपी को पीटा, हुई मौत.

कोविंद ने कहा, ‘‘ भारत जैसी बड़ी और जीवंत अर्थ-व्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए ‘ज्ञान सृजन’ तथा शोध को प्रोत्साहित करना जरूरी है। केंद्र व राज्य सरकारों को शोध तथा नवाचार में निवेश का प्रतिशत बढ़ाना होगा।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि 1968 की शिक्षा नीति से लेकर इस शिक्षा नीति तक, एक स्वर से निरंतर यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी के 6 प्रतिशत निवेश का लक्ष्य रखना चाहिए।

यह भी पढ़े | कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का मोदी सरकार पर तंज, कहा- भारत आज दुनिया की ‘कोरोना कैपिटल’ बन गया है: 7 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

उन्होंने कहा कि 2020 की इस शिक्षा नीति में इस लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचने की अनुशंसा की गयी है

उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के आकलन के अनुसार, भारत के कार्यबल में 5 प्रतिशत से भी कम लोगों ने औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की थी। यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका में 52 प्रतिशत, जर्मनी में 75 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 96 प्रतिशत थी।

कोविंद ने कहा, ‘‘ भारत में व्यावसायिक शिक्षा के प्रसार में तेजी लाने की आवश्यकता को देखते हुए यह तय किया गया है कि स्कूल तथा उच्च शिक्षा प्रणाली में वर्ष 2025 तक कम से कम 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षार्थियों एवं नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और यह 21वीं सदी की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं के अनुरूप देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ शिक्षा के माध्यम से हमें ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ विश्व-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत हों और सही अर्थों में वैश्विक नागरिक बन सकें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ओं, कला और संस्‍कृति को प्राथमिकता दी गई है। इससे विद्यार्थियों में सृजनात्‍मक क्षमता विकसित होगी और भारतीय ओं की ताकत और बढ़ेगी। विविध ओं वाले हमारे देश की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने में इससे मदद मिलेगी।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\