इस्लामाबाद, 11 मई पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी दल ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (पीटीआई) ने उसके प्रमुख इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में अपनी संलिप्तता से बृहस्पतिवार को इनकार किया और इस संबंध में सेना के बयान को ‘‘तथ्यों के विपरीत’’ एवं ‘‘जमीनी वास्तविकताओं की खराब समझ पर आधारित’’ बताया।
पीटीआई ने ट्विटर पर साझा किए एक बयान में कहा कि वह शांति एवं अहिंसा के जरिए और संविधान का पालन करके अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विश्वास करती है।
उसने कहा, ‘‘पीटीआई ने संविधान और कानून का पालन नहीं करने को हमेशा हतोत्साहित किया है। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद जनता की प्रतिक्रिया कई कारकों से जुड़ी है।’’
पार्टी ने कहा, ‘‘(सेना का) बयान पाकिस्तान के सबसे विश्वसनीय, लोकप्रिय और सबसे बड़े राजनीतिक दल के खिलाफ नफरत और बदले की भावना का एक दुखद संग्रह है।’’
समाचार पत्र ‘डॉन’ के अनुसार, पीटीआई ने कहा कि सेना की मीडिया शाखा ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन’ (आईएसपीआर) द्वारा बुधवार को जारी बयान ‘‘तथ्यों के विपरीत’’ और ‘‘जमीनी हकीकत की खराब समझ पर आधारित है।’’
पाकिस्तानी सेना ने अपने प्रतिष्ठानों पर हमले को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों को “कड़ा जवाब” देने की बुधवार को चेतावनी दी थी और कहा था कि किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। साथ ही, उसने नौ मई को उसके प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को देश के इतिहास का ‘‘काला अध्याय’’ करार दिया था।
भ्रष्टाचार मामले में खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने मंगलवार को सेना के जनरल मुख्यालय और कई अन्य सैन्य संपत्तियों और प्रतिष्ठानों पर धावा बोल दिया था। उन्होंने सैन्य वाहनों और प्रतिष्ठानों पर हमला किया और लाहौर कोर कमांडर के आवास में आग लगा दी।
सेना की मीडिया शाखा अंतर सेवा जनसंपर्क (आईएसपीआर) ने कहा, “ हम किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने देंगे।”
आईएसपीआर ने कहा कि एक तरफ ये बदमाश अपने "सीमित और स्वार्थी उद्देश्यों" को हासिल करने के लिए देश की भावनाओं को भड़काते हैं और दूसरी तरफ लोगों को धोखा देते हैं। उसने कहा कि यह पाखंड की एक मिसाल है।
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