नयी दिल्ली, दो अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां फतेहपुर बेरी गांव में वर्षाजल संचयन योजना को लागू करने के आश्वासन के बाद दो पड़ोसियों के बीच हुए संघर्ष के संबंध में दर्ज की गयी प्राथमिकियां खारिज कर दी हैं।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि संबंधित पक्षों की हरकतों के चलते पुलिस को लगाना पड़ा और पुलिस का उपयोगी वक्त जाया हो गया जबकि उसका समाज की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि अब संबंधित पक्षों के बीच समझौता हो गया है, ऐसे में उन्हें सामाजिक भलाई का कुछ काम करना चाहिए।
अदालत ने कहा कि संबंधित पक्ष यह सुनिश्चित करें कि यह (वर्षाजल संचयन) योजना सफल रहे तथा वे 10 सालों तक उसकी देखभाल करें। अदालत ने कहा कि साथ ही वे इसके लिए जरूरी वित्तीय संसाधन एवं श्रमबल उपलब्ध करायें।
अदालत ने 26 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘संबंधित पक्ष यह लिखकर दें कि वे दिल्ली के फतेहपुर बेरी गांव में वर्षाजल संचयन योजना को लागू करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वह सफल हो तथा 10 सालों तक उसकी देखभाल भी करेंगे। वे इस अदालत में तस्वीरों के साथ हर छमाही प्रगति रिपोर्ट पेश करेंगे।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ (संबंधित पक्ष) वर्षा जल संचयन व्यवस्था को लागू करने एवं कम से कम दस साल तक उसके रखरखाव के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन एवं श्रमबल उपलब्ध करायेंगे। इस संबंध में आज से चार हफ्ते के अंदर जरूरी कार्रवाई की जाए।’’
अदालत में दायर की गयी याचिकाओं में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को खारिज करने का अनुरोध किया था।
दोनों पक्ष पड़ोसी हैं और रिश्तेदार भी। उन्होंने परस्पर समझौता कर लिया और अदालत से प्राथमिकियों को रद्द करने का अनुरोध किया था। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें अपने किये पर पछतावा है और वे भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे।
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