नयी दिल्ली, 22 फरवरी चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी मद्रास) द्वारा आयोजित एशिया की पहली वैश्विक हाइपरलूप प्रतियोगिता (जीएचसी)-2025 में 10 हाइपरलूप टीम के कुल 200 छात्र प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह प्रतियोगिता 21-25 फरवरी तक चलेगी जिसमें गतिशीलता, अनुसंधान और हाइपरलूप क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले दुनियाभर के 150 उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
प्रतियोगिता मुख्य परिसर से लगभग 36 किलोमीटर दूर थाईयूर में स्थित आईआईटी-मद्रास के दूसरे परिसर ‘डिस्कवरी’ में आयोजित की जा रही है।
जीएचसी-2025 का मकसद भारत को हाइपरलूप नवाचार के केंद्र में स्थापित करने के लिए है। अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं, उद्योग जगत के सफल लोगों और शोधकर्ताओं को एकजुट करना और सहयोग, नवाचार को बढ़ावा देना तथा हाइपरलूप तकनीक का वास्तविक दुनिया में कार्यान्वयन करना है।
हाइपरलूप परिवहन का पांचवां माध्यम है, यह एक हाई-स्पीड ट्रेन है जो लगभग निर्वा ट्यूब में यात्रा करती है। कम वायु प्रतिरोध के कारण ट्यूब के अंदर का कैप्सूल 1000 किमी/घंटा से अधिक की गति को हासिल कर सकता है।
‘स्पेसएक्स’ और ‘टेस्ला’ के प्रमुख एलन मस्क ने 2013 में एक श्वेतपत्र - ‘हाइपरलूप अल्फा’ के माध्यम से दुनिया के सामने हाइपरलूप का विचार प्रस्तुत किया था।
रेलवे बोर्ड के प्रधान कार्यकारी निदेशक पंकज शर्मा ने कहा, ‘‘यह प्रतियोगिता न केवल नवाचार का उत्सव है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारत किस तरह से परिवहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है।’’
यह प्रतियोगिता आईआईटी मद्रास, आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन और एसएई इंडिया द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत सरकार के रेल मंत्रालय का अतिरिक्त सहयोग भी शामिल है।
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने कहा, ‘‘वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश अपने महत्वपूर्ण गंतव्यों के बीच बहुत तेज हाइपरलूप कनेक्टिविटी का एहसास करेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य दुनिया भर में हाइपरलूप अवधारणाओं को प्रदर्शित करना और उनका प्रचार करना है, जिससे परिवहन के क्षेत्र में युवाओं में परिवर्तन लाने की भावना को बढ़ावा मिले।’’
कामकोटि ने कहा कि आईआईटी मद्रास पिछले सात वर्षों से हाइपरलूप अनुसंधान में सबसे आगे रहा है और इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
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