देश की खबरें | विशेष ऑडिट में बेईमानी की बात साबित हुई तो वक्फ बोर्ड में रहने का हक नहीः अमानतुल्लाह खान

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और ओखला से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने बुधवार को कहा कि विशेष ऑडिट में अगर यह साबित होता है कि बोर्ड प्रमुख रहते हुए उन्होंने कोई बेईमानी की है तो उन्हें बोर्ड में रहने का कोई "हक " नहीं है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और ओखला से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने बुधवार को कहा कि विशेष ऑडिट में अगर यह साबित होता है कि बोर्ड प्रमुख रहते हुए उन्होंने कोई बेईमानी की है तो उन्हें बोर्ड में रहने का कोई "हक " नहीं है।

खान के बोर्ड के अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं का विशेष ऑडिट किया जा रहा है.

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विधायक को पिछले महीने बोर्ड का सदस्य चुना गया था और उनके लगातार तीसरी बार बोर्ड के अध्यक्ष बनने के आसार हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को "आप " नीत सरकार से कहा था कि खान के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए विशेष ऑडिट चल रहा है, ऐसे में वह कैसे विधायक को बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त होने दे सकती है। इसके बाद बोर्ड के सदस्यों की एक बैठक 19 नवंबर तक के लिए टाल दी गई है।

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इस बीच, बोर्ड के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और दिल्ली सरकार के मंडलीय आयुक्त को चिट्ठी लिखकर अपनी परेशानियां बताई हैं, जिनमें बीते पांच महीने के दौरान सामने आई दिक्कतों का भी जिक्र है।

एक कर्मचारी ने बताया, " अध्यक्ष के नहीं होने से दिल्ली वक्फ बोर्ड का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंध करना भी मुश्किल हो रहा है और बिजली का बिल जमा नहीं होने से डिस्कॉम से बिजली आपूर्ति काटने के संबंध में नोटिस मिला है। "

अधिकारियों ने बताया कि खान के अध्यक्ष के कार्यकाल मार्च 2016 से मार्च 2020 की अवधि में कथित अनियमितताओं की जांच करने के लिए पिछले महीने एक विशेष ऑडिट शुरू किया गया था। चार सदस्य टीम यह काम कर रही है।

खान ने बुधवार को टवीट किया, " दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के कामों का ऑडिट कराने का दिल्ली सरकार का फ़ैसला काबिले तारीफ़ है। आम आदमी पार्टी की सरकार सिर्फ ईमानदारी की बुनियाद पर बनी थी, अगर ऑडिट रिपोर्ट में ये साबित होता है कि मैंने वक़्फ़ बोर्ड में रहते हुए बेइमानी की तो मुझे वक़्फ़ बोर्ड में रहने का कोई हक नही।"

खान 2016 में करीब छह महीने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष रहे और फिर सितंबर 2018 से मार्च 2020 तक इस पद पर काबिज रहे।

बहरहाल, बोर्ड फरवरी से बिना अध्यक्ष के है जिस वजह से कर्मचारियों की तनख्वाह, मस्जिदों के करीब 300 इमामों और मुअज़्ज़िनों का मानदेय, करीब 1300 विधवाओं और बुजुर्गों की पेंशन का भुगतान नहीं हो पा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है, " स्थायी कर्मचारियों को मई से तनख्वाह नहीं मिली है जबकि अनुबंध कर्मियों को जनवरी के बाद से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा, व्यवस्था के टूटने की वजह से स्टेशनरी, खत भेजने और कागज़ी काम का प्रबंध करने में भी दिक्कत हो रही है। "

उन्होंने पत्र में लिखा है कि वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 17 (2) के तहत अध्यक्ष की गैर हाजिरी में, बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता सदस्यों में से कोई कर सकता है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड में सात सदस्य हैं, जिनमें से एक को अध्यक्ष चुना जाता है।

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