देश की खबरें | कोई भी व्यक्ति अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का श्रेय लेने की आज कोशिश करे तो यह गलत है: कमलनाथ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए बुधवार को हुए भूमि पूजन एवं शिलान्यास को ऐतिहासिक बताते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि कोई भी व्यक्ति अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का आज श्रेय लेने की कोशिश करे तो यह गलत है।
भोपाल, पांच अगस्त अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए बुधवार को हुए भूमि पूजन एवं शिलान्यास को ऐतिहासिक बताते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि कोई भी व्यक्ति अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का आज श्रेय लेने की कोशिश करे तो यह गलत है।
उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राम मंदिर का ताला खुलवाया था और बहुत समय से हर भारतवासी की आकांक्षा थी कि राम मंदिर का निर्माण हो।
यहां प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के मुख्यद्वार पर भगवान श्रीराम की तस्वीर के सामने बुधवार शाम को दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव का शुभारम्भ करने एवं आरती कर भगवान श्रीराम का पूजन करने के बाद कमलनाथ ने मीडिया को बताया, ‘‘आज का दिन देश के लिए ऐतिहासिक है। बहुत समय से हर भारतवासी की आशा एवं आकांक्षा थी कि राम मंदिर का निर्माण हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज से राम मंदिर का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इसलिए आज हम सभी के लिये ख़ुशी का क्षण है।’’
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कमलनाथ ने कहा, ‘‘:पूर्व प्रधानमंत्री: राजीव गांधी जी ने 1985 में राम मंदिर का ताला खुलवाया था और यह भावना उस समय से ही जुड़ी थी। उन्होंने :राजीव गांधी: 1989 में कहा था कि रामराज्य लाऊंगा, राम मंदिर बनना चाहिए। यह कोई आज की बात नहीं है और आज इसका कोई श्रेय लेने की कोशिश करें तो यह गलत है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे तो खुशी होती आज जो निर्माण शुरू हुआ है, उसमें अपने देश का हर मुख्यमंत्री होता, अपने देश की हर जाति के प्रतिनिधि होते, हर धर्म के प्रतिनिधि होते, क्योंकि यह देश किसी एक का नहीं है, उत्तर का नहीं है, दक्षिण का नहीं है, पूर्व का नहीं है,पश्चिम का नहीं है।’’
कमलनाथ ने कहा, ‘‘आज आयोजन को सीमित किया गया। मुझे पता है कोरोना वायरस महामारी फैली हुई है, लेकिन व्यवस्था कर 100-150 लोगों को बुलाया जा सकता था। हमारे देश की पहचान विभिन्नता से है, अनेकता में एकता से है। हमारे देश में कितने धर्म है, कितनी एं है, कितनी जातियां है, कितने देवी-देवता हैं। यह विश्व के किसी देश में है क्या?’’
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