देश की खबरें | आईसीएमआर ने बर्ड फ्लू रोधी टीके के विकास की प्रक्रिया शुरू की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) से बचाव में कारगर स्वदेशी टीके के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नयी दिल्ली, पांच फरवरी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) से बचाव में कारगर स्वदेशी टीके के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस का बेहद संक्रामक स्वरूप है, जो भारत में पशु एवं मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

आईसीएमआर ने एच5एन1 संक्रमण से बचाव में कारगर टीके के निर्माण के लिए अनुसंधान एवं विकास में सहयोग के वास्ते पात्र संगठनों, कंपनियों, निर्माताओं से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आवेदन आमंत्रित किए हैं।

ईओआई आमंत्रण से जुड़े दस्तावेज में कहा गया है कि 2021, 2023 और 2024 में कई राज्यों में एच5एन1 संक्रमण के प्रकोप की सूचना मिली है, जिससे मुख्य रूप से पोल्ट्री और जंगली पक्षी प्रभावित हुए हैं।

इसमें कहा गया है कि एच5एन1 संक्रमण के प्रकोप से पोल्ट्री उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है और वायरस के “जूनोटिक पोटेंशियल” यानी मानव आबादी को संक्रमित करने की क्षमता के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं भी पैदा हुई हैं।

दस्तावेज के मुताबिक, एच5एन1 संक्रमण अपनी उच्च मृत्यु दर और वैश्विक महामारी को जन्म देने की क्षमता के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

इसमें कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर भले ही इंसानों में एच5एन1 संक्रमण के प्रसार के छिटपुट मामले ही सामने आते हैं, लेकिन इनसे मनुष्य को संक्रमित करने और गंभीर लक्षणों को जन्म देने की वायरस की क्षमता उजागर होती है।

इंसानों के बीच एच5एन1 संक्रमण की मृत्यु दर 50 फीसदी से अधिक दर्ज की गई है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now