नयी दिल्ली, 19 फरवरी भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) ने बुधवार को कहा कि लेखा परीक्षा ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ की विशेषता है और वह इस मुद्दे को सरकार की समन्वय समिति के समक्ष उठाया जाएगा।
कंपनी सचिवों और लागत लेखाकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली सहयोगी संस्थाओं के नये आयकर विधेयक के तहत अपने सदस्यों के लिए ‘‘लेखाकार’’ का दर्जा मांगे जाने के बीच आईसीएआई का यह बयान आया है।
संसद के अधिनियम के तहत स्थापित भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) और भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई) ने मांग की है कि विधेयक में उनके सदस्यों को ‘‘लेखाकार’’ माना जाए।
ये तीन संस्थान आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई संसद के अधिनियम के तहत स्थापित किए गए हैं और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आते हैं।
इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों पर आईसीएआई के अध्यक्ष चरणजोत सिंह नंदा ने बुधवार को कहा कि वह सहयोगी संस्थानों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए उत्साहित हैं।
नंदा ने कहा, ‘‘ मैं इस तथ्य पर एक बार जोर देना चाहता हूं कि लेखा परीक्षा ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ की विशेषता है... कर लेखा परीक्षा चार्टर्ड अकाउंटेंट का विशेषाधिकार है... लेखा परीक्षा वह जिम्मेदारी है जो संसद ने हमें सौंपी है।’’
आईसीएसआई और आईसीएमएआई ने मांग की है कि कंपनी सचिवों और लागत लेखाकारों को आयकर विधेयक, 2025 की धारा 515(3)(बी) में उल्लिखित ‘‘लेखाकार’’ की परि में शामिल किया जाए।
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