जरुरी जानकारी | आईबीए ने प्रतिस्पर्धा आयोग से डेबिट-क्रेडिट कार्ड विक्रेताओं के गिरोह बनाने की आशंका जताई

नयी दिल्ली, 15 सितंबर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने बैंकों को चिप-आधारित डेबिट और क्रेडिट कार्ड की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं के बीच संभावित गिरोहबंदी की जांच करने का अनुरोध भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से किया है।

बैंकों के राष्ट्रीय संगठन आईबीए को विभिन्न विक्रेताओं द्वारा डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड के दाम बढ़ाने की शिकायतें मिली थीं। कार्ड मुहैया कराने वाले विक्रेताओं का कहना था कि चिप की कमी की वजह से दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि उनके द्वारा मूल्य वृद्धि भी समान दायरे में की गई थी जिससे गिरोहबंदी की आशंका पैदा होती है।

शिकायतें मिलने पर आईबीए ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया और इस बारे में वित्त मंत्रालय को भी सूचित कर दिया है।

एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष चार-पांच बड़े कार्ड विक्रेताओं ने बैंकों से कहा था कि चिप की कमी की वजह से दाम बढ़ाने पड़े हैं। इसके बाद सारे बैंक एक कार्ड का दाम 35 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये देने को तैयार हो गए।

उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले इन विक्रेताओं ने फिर से बैंकों से दाम बढ़ाने की मांग की। हालांकि इस बार केवल बड़े निजी बैंक ही प्रति कार्ड अतिरिक्त 10 रुपये देने को तैयार हुए जबकि सरकारी बैंकों ने अधिक पैसा देने से इनकार कर दिया। इसकी वजह से इन बैंकों को कार्ड आपूर्ति की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आईबीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि कार्ड विक्रेता स्थिति का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि चिप की कमी इतनी भी गंभीर नहीं है। इसकी वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नए खाताधारकों को डेबिट कार्ड जारी करने में परेशानी हो रही है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)