ताजा खबरें | मैं खुद जनजातीय समुदाय का हूं और इस देश का कानून मंत्री हूं : रिजीजू

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. आदिवासी कल्याण के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजीजू ने बुधवार को कहा कि इस बात का सबूत यह है कि पहली बार, आज केंद्र सरकार में जनजातीय समुदाय के तीन कैबिनेट मंत्री तथा पांच राज्य मंत्री हैं और ‘‘मैं खुद जनजातीय समुदाय का हूं और इस देश का कानून मंत्री हूं। यह अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है।

नयी दिल्ली, 16 मार्च आदिवासी कल्याण के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजीजू ने बुधवार को कहा कि इस बात का सबूत यह है कि पहली बार, आज केंद्र सरकार में जनजातीय समुदाय के तीन कैबिनेट मंत्री तथा पांच राज्य मंत्री हैं और ‘‘मैं खुद जनजातीय समुदाय का हूं और इस देश का कानून मंत्री हूं। यह अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के कामकाज पर राज्यसभा में हो रही चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए रिजीजू ने कहा ‘‘देश में आदिवासियों की आबादी करीब आठ फीसदी है। उनके मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाने के कारणों के बारे में, आदिवासियों के अपने विचारों के बारे में समझना बहुत जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि आदिवासी छोटे छोटे समूहों में रहते बसते हैं और उनकी बातें उनके मुद्दे उनके लिए बड़े होते हैं भले ही उनके समूह छोटे हों। उन्होंने कहा कि अपने मुद्दों को लेकर दिल्ली आने वाले आदिवासियों से मिलने के लिए पहले किसी के पास समय नहीं होता था। उन्होंने कहा ‘‘कभी तो धैर्य होता है अैर मुद्दों को सुलझा लिया जाता है लेकिन कभी नाराजगी बढ़ जाती है और वे हथियार उठा लेते हैं।’’

रिजीजू ने कहा ‘‘भारत विविधताओं से भरा देश है जिसमें छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले पूर्वोत्तर राज्यों में आए दिन बंद इसीलिए होता था क्योंकि वहां के आदिवासियों की बात नहीं सुनी जाती थी। अब ऐसा नहीं है। इसका उदाहरण हाल ही में मणिपुर में संपन्न विधानसभा चुनाव हैं।’’

उन्होंने कहा ‘‘सबसे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि पूर्वोत्तर क्षेत्र और जनजातीय समुदाय के लिए भी अलग अलग मंत्रालय बनने चाहिए। उस समय बोया हुआ यह बीज आज पेड़ बन चुका है।’’

उन्होंने कहा कि पहली बार, आज सरकार में जनजातीय समुदाय के तीन कैबिनेट मंत्री तथा पांच राज्य मंत्री हैं और ‘‘मैं खुद जनजातीय समुदाय का हूं और इस देश का कानून मंत्री हूं। यह अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है। राजनीति अपनी जगह चलती रहती है लेकिन कई बातें इससे अलग होती हैं और भावनाओं से भी जुड़ती हैं।’’

कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजीजू ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा ‘‘आदिवासी बेहद सीधे सादे होते हैं। वे अगर अपने नेता को अगर भगवान का दर्जा देना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है?

उनका इशारा वाम सदस्य विनय विश्वम की ओर था जिन्होंने आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को भगवान कहे जाने पर आपत्ति जताई थी। रिजीजू ने कहा कि बिरसा मुंडा को भगवान का सम्मान भाजपा ने नहीं दिया है।

रिजीजू ने कहा कि 1994 में पी ए संगमा को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने पर जब वह (रिजीजू) ‘‘अखिल भारतीय आदिवासी छात्र संघ’’ के सचिव के तौर पर उन्हें बधाई देने गए तब उन्हें पता चला कि संगमा आदिवासी समुदाय के पहले कैबिनेट मंत्री हैं। रिजीजू ने कहा ‘‘मैं सोचने लगा कि देश तो 1947 में आजाद हुआ है फिर एक आदिवासी के कैबिनेट मंत्री बनने में इतना समय क्यों लगा?’’

रिजीजू ने कहा ‘‘लंबे समय तक बड़ी संख्या में जनजातियों का नाम संविधान की जनजातियों की सूची में नहीं था। इसके लिए कदम नरेंद्र मोदी सरकार ने उठाया और अरुणाचल प्रदेश के आदिवासियों को जनजातियों की सूची में डाला गया।’’

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों के साथ भेदभाव के मामले आते थे। उन्होंने कहा कि जब वह गृह राज्य मंत्री थे तब दिल्ली पुलिस में पूर्वोत्तर राज्य के 1000 लोगों की भर्ती की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस में एक नयी कमांडो टीम ‘‘स्वाट’’ बनाई गई जिसमें पूर्वोत्तर की महिलाओं को लिया गया। उन्होंने कहा ‘‘ये कदम प्रतीकात्मक ही सही, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण हैं।’’

रिजीजू ने कहा कि इस साल को ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’’ के तौर पर मनाया जा रहा है और ऐसे में आदिवासियों को अगर सम्मान मिला रहा है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। ‘‘यही वजह है कि 15 नवंबर को आदिवासी नेता बिरसा मुंडा के जन्मदिन को जनजातीय गौरव दिवस पर मनाये जाने की शुरूआत की गई।’’

उन्होंने कहा ‘‘खुद प्रधानमंत्री ने देश की आजादी के लिए आदिवासियों के योगदान के संबंध में रिकॉर्ड मंगवाए और उनके स्मारक बनाए जा रहे हैं। ’’

रिजीजू ने कहा कि यह सही है कि आदिवासियों का अस्तित्व जल, जंगल, जमीन से है लेकिन हमें इससे आगे भी तो जाना है। इसकी शुरूआत इस बजट से की गई है। उन्होंने पहली बार मार्केटिंग फार ट्राइबल प्रोडक्ट इन नॉर्थ ईस्ट, एकलव्य स्कूल, प्रधानमंत्री वन बंधु कल्याण योजना आदि की उल्लेखनीय पहलें तथा इसके लिए 28,928 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इनके दूरगामी परिणाम तो मिलेंगे ही।’

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की आदिवसियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता इससे स्पष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासी कल्याण के लिए हम विपक्ष को सहयोग देने के लिए आमंत्रित करते हैं।’’

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