ऑस्ट्रेलिया में सैकड़ों लोग चुन चुके हैं इच्छा मृत्यु

ऑस्ट्रेलिया में पिछले हफ्ते 23 वर्षीय युवती ने इच्छा मृत्यु को चुन लिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ऑस्ट्रेलिया में पिछले हफ्ते 23 वर्षीय युवती ने इच्छा मृत्यु को चुन लिया. अब तक सैकड़ों लोग इस अधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं.23 साल की लिली थाई नहीं रहीं. पिछले हफ्ते उन्होंने अपनी मर्जी से अंतिम सांस ली. इसी साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के साउथ ऑस्ट्रेलिया में पारित हुए कानून के ताहत लिली थाई को उनकी इच्छा से मृत्यु दे दी गई.

ऐसा तब हुआ है जब ऑस्ट्रेलिया के एक अन्य राज्य राजधानी क्षेत्र कैनबरा (एसीटी) की सरकार इच्छा मृत्यु के अधिकार की न्यूनतम आयु 14 वर्ष करने की तैयारी में है. लिली थाई की मृत्यु ने एसीटी में कानून में बदलाव की मांग कर रहे लोगों को और ज्यादा मजबूत किया है.

लिली थाई को एहलेर्स डनलोस सिंड्रोम (ईडीएस) नाम की एक बीमारी थी जिसका कोई इलाज नहीं है. इस बीमारी में शरीर खुद ही अपने आपको खत्म करने लगता है. इस बीमारी का पता चलने के बाद से ही थाई साउथ ऑस्ट्रेलिया राज्य में इच्छा मृत्यु का अधिकार दिये जाने की वकालत कर रही थीं.

इच्छामृत्यु से नाराज कैथोलिक चर्च

इच्छा मृत्यु के समर्थक डॉ. फिलिप नीत्श्के ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि थाई का मामला इच्छा मृत्यु के पक्ष को और मजबूत करेगा. द अडवर्टाइजर अखबार से डॉ नीत्श्के ने कहा, "लिली के मामले में हमने देखा कि साउथ ऑस्ट्रेलिया के कानून काम कर रहे हैं. और मुझे लगता है कि बहुत से लोग इस बात से खुश होंगे कि ऐसा कानून था जिसके सहारे लिली की मदद की जा सकी. जिन लगभग 12 लोगों ने इस कानून का इस्तेमाल किया है, उन्हें ना ठीक हो सकने वाला कैंसर या कोई न्यूरोलॉजिकल बीमारी थी. ये सभी मामले ऐसे थे जिनके लिए शायद ही कोई ऐसा हो जो कानून का विरोध करेगा.”

न्यूनतम आयु 14 वर्ष करने की तैयारी

ऐसे ही कुछ तर्कों के आधार पर कैनबरा की सरकार अब अपने यहां के कानून का दायरा बढ़ाना चाहती है ताकि 14 वर्ष से अधिक के किशोरों को भी अपनी जिंदगी का अंत करने का अधिकार मिल सके. अगर यह कानून पास हो जाता है तो ऑस्ट्रेलिया में इच्छा मृत्यु को लेकर सबसे उदार कानून होगा, जिसके तहत बच्चों को भी ऐसे अधिकार मिल सकेंगे.

मरने के लिए स्विट्जरलैंड जाएंगे बुजुर्ग वैज्ञानिक

इस कानून के बारे में बात करते हुए हाल ही में राज्य की मानवाधिकार मंत्री तारा शाएन ने कहा था कि हम फैसले लेने के लिए परिपक्वता की आयु 18 से घटाकर 14 वर्ष करने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आयु सीमा विवेक का मामला है और सिर्फ जन्मदिन पार कर लेना काफी नहीं होगा बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ उस व्यक्ति की निर्णय क्षमता पर फैसला करेंगे."

शाएन के मुताबिक उनके कानून को जनता का समर्थन हासिल है, जो इसके बारे में सामुदायिक सलाह कार्यक्रमों में भी नजर आई. उन्होंने कहा कि कम्यूनिटी कंसल्टेशन में 3,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया और 500 लोगों ने लिखित में अपनी राय दी. 80 फीसदी लोगों ने इच्छा मृत्यु का समर्थन किया.

ऑस्ट्रेलिया में इच्छा मृत्यु को कानूनन लागू करने वाला विक्टोरिया पहला राज्य था. वहां 2017 में ऐसा कानून लागू किया गया था. उसके बाद अन्य सभी राज्यों ने ऐसे ही कानून लागू कर दिये. हालांकि सभी राज्यों के कानूनों में थोड़ा-बहुत अंतर है लेकिन योग्यता के मानकों को लेकर सभी एक जैसे हैं और न्यूनतम आयु सीमा 18 साल रखी गयी है.

इच्छा मृत्यु के योग्य होने के लिए मरीज को ऐसी बीमारी से ग्रस्त होना चाहिए जिसका इलाज संभव नहीं है और उसकी मृत्यु अगले छह से 12 महीने के भीतर हो सकती है. मरीज का आकलन कम से कम दो स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है.

सैकड़ों लोगों ने चुनी इच्छा मृत्यु

2017 विक्टोरिया में कानून के लागू होने के बाद से देशभर में सैकड़ों लोग इच्छा मृत्यु चुन चुके हैं. विक्टोरिया में ऐसा करने वालों की संख्या 600 से ज्यादा है. इनमें से 75 फीसदी लोगों की आयु 65 या उससे ऊपर थी और 80 प्रतिशत से ज्यादा कैंसर पीड़ित थे. वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया राज्य में कानून लागू होने के बाद एक साल के भीतर ही 190 लोग इच्छा मृत्यु को चुन चुके थे.

दुनिया के कुछ ही देशों ने इस तरह के कानून बनाये हैं. ऑस्ट्रेलिया के अलावा बेल्जियम, कनाडा, कोलंबिया, लग्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, स्पेन में इच्छा मृत्यु का अधिकार दिया गया है.

पुर्तगाल भी ऐसा कानून पारित करने की तैयारी में है. अर्जेन्टीना में कुछ बदलावों के साथ इलाज से इनकार करने का अधिकार दिया गया है. इसी तरह जर्मनी में भी लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने का अधिकार दिया गया है.

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