देश की खबरें | अस्पताल को दबाव बनाने का अधिकार लेकिन रोगियों की देखभाल प्रमुख कर्तव्य : एनसीडीआरसी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 अगस्त राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा है कि अस्पतालों को भुगतान के लिए दबाव बनाने का अधिकार है लेकिन इसका मुख्य कर्तव्य रोगियों की देखभाल करना है। क्रिश्चन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर में एक व्यक्ति की चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत पर उसकी पत्नी को 25 लाख रुपये का मुआवजे देने का आदेश देते हुए अदालत ने यह बात कही।

पीठासीन सदस्य एस. एम. कानितकर और दिनेश सिंह की पीठ ने मृतक की पत्नी यशुमति देवी को मुआवजे का भुगतान करने का आदेश देते हुए कहा कि रोगी के मस्तिष्क का सीटी स्कैन कराने की तुरंत आवश्यकता थी लेकिन इसमें तीन घंटे से अधिक की देरी की गई क्योंकि अस्पताल 1850 रुपये के प्रक्रिया शुल्क का इंतजार करता रहा।

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पीठ ने कहा, ‘‘उपरोक्त जांच के आधार पर स्पष्ट है कि सेवा में कमी...लापरवाही की गई। हमारे विचार में तथ्यों को देखते हुए रोगी की मृत्यु होने के समय से आठ फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ 25 लाख रुपये का मुआवजा उचित प्रतीत होता है।’’

इसने कहा कि आदेश पारित होने के छह महीने के अंदर मुआवजे का भुगतान करना होगा।

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शिकायत के मुताबिक 58 वर्षीय व्यक्ति के बायें हाथ में दर्द रहता था। व्यक्ति ने 2009 में बायें हाथ में दर्द की शिकायत होने पर अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क किया।

रोगी को सीएमसी में दाखिल कराया गया। अगले दिन जांच के बाद पता चला कि उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) है।

शिकायत के मुताबिक अस्पताल ने रोगी को हेरपारीन की खुराक देनी शुरू कर दी। इसमें बताया गया कि बिना प्रयोगशाला जांच या निगरानी प्रोटोकॉल के ये दवाएं दी गईं।

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