देश की खबरें | न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं, परीक्षाओं के संबंध में कुलपतियों से करेंगे बात : मंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है और परीक्षाएं आयोजित करने के संबंध में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार-विमर्श करके फैसला लिया जाएगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुम्बई, 28 अगस्त महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है और परीक्षाएं आयोजित करने के संबंध में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार-विमर्श करके फैसला लिया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपने एक फैसले में कहा कि राज्य और विश्वविद्यालय 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षायें आयोजित किये बगैर छात्रों को प्रोन्नत नहीं कर सकते।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये अंतिम वर्ष की परीक्षायें कराने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के फैसले को सही ठहराते हुये कहा कि अगर किसी राज्य को लगता है कि कोविड-19 महामारी की वजह से वह नियत तारीख तक परीक्षा आयोजित नहीं कर सकता है तो उसे नयी तारीख के लिये यूजीसी से सम्पर्क करना होगा।

सामंत ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ राज्य सरकार न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है। मैं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस संबंध में बात करूंगा और इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।’’

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उन्होंने कहा कि हम आदेश पर पूरी तरह गौर करने के बाद ही उचित कदम उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने परीक्षाएं कराने की यूजीसी की 30 सितम्बर की समय सीमा मे ढील दी है। हम आपदा प्रबंधन समिति से भी इस संबंध में चर्चा करेंगे।

सामंत ने कहा कि वैश्विक महामारी के मद्देनजर छात्रों का स्वास्थ्य प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत है। मौजूदा स्थिति में, अगर परीक्षाएं हो तो छात्रों को कोई संक्रमण नहीं होना चाहिए।’’

अंतिम वर्ष की परीक्षायें स्थगित करने के लिये शिवसेना के युवक प्रकोष्ठ युवा सेना सहित कई याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षायें कराने के यूजीसी के फैसले पर सवाल उठाये थे।

यूजीसी ने इससे पहले कहा था कि छह जुलाई के दिशानिर्देश विशेषज्ञों की सिफारिश पर आधारित हैं और विस्तृत मंत्रणा के बाद ही इन्हे तैयार किया गया है। यूजीसी ने कहा कि यह दावा करना गलत होगा कि इस दिशानिर्देशों के अनुसार अंतिम साल की परीक्षायें कराना संभव नहीं होगा।

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