नयी दिल्ली, नौ सितंबर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों एवं जम्मू कश्मीर जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में कोविड के बाद के दौर में विकास को गति देने के लिए अपार संभावनाएं हैं।
यहां ‘हिमालय दिवस’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि सदियों से हिमालय विदेशी आक्रमण और प्रकृति के हमले खिलाफ भारत के लिए संरक्षण प्रहरी की तरह खड़ा रहा है ।
वैज्ञानिक अनुसंधान का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से के लिए हिमालय पानी, वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं का एक बड़ा स्रोत रहा है।
उन्होंने कहा कि साथ ही हिमालय से निकलने वाली नदियां, चाहे वह गंगा हो या सिंधु, प्रचुर संभावनाएं प्रदान करती है जिनका अभी पूरी तरह दोहन किया जाना है।
जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, असम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से हिमालय के आसपास हैं।
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री सिंह ने कहा कि हिमालय में प्रचुर संसाधन हैं लेकिन उनकी संभावनाओं का दोहन नहीं किया गया है और ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मानवता के हित में उनके संरक्षण एवं इष्टतम उपयोग के लिए पर्याप्त पहल की जा रही हैं ?
उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके राजनीति समेत सभी संकीर्णताओं से ऊपर उठकर समाधान की जरूरत है।
मंत्री ने कहा कि बाढ़, भूस्खलन, वनों की कटाई, पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु बदलाव जैसी चिंताओं के बावजूद हिमालय में कोविड के बाद के दौर में विकास को गति देने और इंसान के बचाव में आगे आने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि कोविड त्रासदी ने लोगों को हिमालयी संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने की जरूरत का अहसास कर दिया है।
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