कोलकाता, 18 अप्रैल कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी एवं तृणमूल कांग्रेस के विधायक तापस साहा को पश्चिम बंगाल पुलिस की भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के पास स्थानांतरित कर दिया जाए।
अदालत ने कहा कि यदि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मामले की जांच करे तो सही रहेगा क्योंकि एजेंसी उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ के आदेशों पर, राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कथित अवैध भर्ती के अन्य मामलों की जांच कर रही है।
न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने यह अजीब बात पाई कि विधायक के खिलाफ साक्ष्य पाये जाने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि मामले में तीन अन्य आरोपियों को एसीबी ने गिरफ्तार किया था।
उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में ‘ग्रुप सी’ और ‘ग्रुप डी’ पदों पर नौकरी का वादा कर लोगों से कथित तौर पर पैसे लिये जाने के मामले को राज्य एसीबी से सीबीआई के पास स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि राज्य में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में नौकरी दिलाने का वादा कर नादिया जिले की तेहट्टा सीट से विधायक की ओर से तीन आरोपियों ने काफी मात्रा में रकम प्राप्त की।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि राज्य में पुलिस और अग्निशमन विभाग में नौकरी दिलाने का भी वादा किया गया था।
याचिकाकर्ता ने इस आधार पर जांच स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था कि सीबीआई पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग से जुड़े भर्ती घोटाले की विस्तृत जांच पहले से कर रही है, जिसकी उच्च न्यायालय द्वारा निगरानी की जा रही है।
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